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राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी, नई SOP से नहीं मानी बात; वीडियो में जाने माल ढुलाई ठप, सप्लाई चेन पर बढ़ा संकट

राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी, नई SOP से नहीं मानी बात; वीडियो में जाने माल ढुलाई ठप, सप्लाई चेन पर बढ़ा संकट
 
राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी, नई SOP से नहीं मानी बात; वीडियो में जाने माल ढुलाई ठप, सप्लाई चेन पर बढ़ा संकट

राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट और ई-डिटेक्शन चालान को लेकर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने स्पष्ट किया है कि परिवहन विभाग द्वारा जारी नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) उनकी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं करती, इसलिए आंदोलन फिलहाल वापस नहीं लिया जाएगा। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का असर अब प्रदेशभर में माल ढुलाई और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है।

नई SOP से नहीं बनी सहमति

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स का कहना है कि सरकार की ओर से जारी नई SOP में उनकी मूल समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, परमिट व्यवस्था और ई-डिटेक्शन चालान से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और व्यावहारिक समाधान नहीं दिया गया।ट्रांसपोर्ट संगठनों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तबतक हड़ताल जारी रहेगी।

हजारों ट्रक खड़े, माल ढुलाई प्रभावित

राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के अनुसार, प्रदेश में करीब 50 हजार ट्रकों के परमिट रद्द होने के कारण उनका संचालन पहले से ही प्रभावित है। वहीं, हड़ताल के चलते अलग-अलग जिलों में करीब 2 से 2.5 लाख ट्रक खड़े कर दिए गए हैं।समिति का दावा है कि अब प्रदेश में लगभग 100 प्रतिशत ट्रकों का संचालन बंद है, जिससे माल ढुलाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

फल-सब्जी से लेकर उद्योगों तक असर

हड़ताल का असर अब बाजार और उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। फल और सब्जी मंडियों, सीमेंट, स्टील, किराना और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। औद्योगिक इकाइयों को भी कच्चा माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।यदि हड़ताल लंबी चली तो बाजार में कई वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने कहा कि दूसरे दिन भी प्रदेशभर में ट्रकों का संचालन बंद रहा। उन्होंने दावा किया कि सभी ट्रक अपने-अपने स्थान पर खड़े हैं और माल परिवहन पूरी तरह ठप हो चुका है।उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो ट्रांसपोर्टर 'जेल भरो आंदोलन' भी शुरू करेंगे। उनका कहना है कि सरकार से कई बार बातचीत के बावजूद अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है।

सरकार की अगली पहल पर नजर

फिलहाल ट्रांसपोर्टरों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। यदि जल्द सहमति नहीं बनती है तो इसका असर राज्य की आपूर्ति व्यवस्था, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर और अधिक गहरा हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार ट्रांसपोर्टरों की मांगों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकल पाता है।