प्रदेश में गिग वर्कर्स के लिए परिवहन विभाग ने लागू की एग्रीगेटर पॉलिसी
गिग वर्कर्स को नियमित सुविधाएं देने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने अब एग्रीगेटर पॉलिसी को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस पॉलिसी का ड्राफ्ट पहले 10 दिन पहले जारी किया गया था, जिसके माध्यम से जनता और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त सुझावों और समीक्षा के बाद विभाग ने अब इसे अंतिम रूप दिया है।
परिवहन विभाग के संयुक्त शासन सचिव एवं अतिरिक्त आयुक्त ओपी बुनकर ने इस पॉलिसी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस पॉलिसी के लागू होने से प्रदेश में गिग वर्कर्स को मान्यता, सुरक्षा और बेहतर कार्य सुविधाएं मिलेंगी। अधिकारीयों का कहना है कि यह कदम गिग इकॉनमी में काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों की गारंटी के लिए लिया गया है।
पॉलिसी के तहत एग्रीगेटर यानी ओला, उबर और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले ड्राइवर और गिग वर्कर्स को परिभाषित मानक, बीमा, कार्य घंटे और न्यूनतम आय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। विभाग का कहना है कि इस पॉलिसी से गिग वर्कर्स को सुरक्षित और नियामक ढांचे के तहत काम करने का अवसर मिलेगा।
पिछले महीने जारी ड्राफ्ट पर जनता और गिग वर्कर्स ने विभिन्न सुझाव दिए थे, जिनमें अधिक पारदर्शिता, शिकायत निवारण तंत्र और कार्य संबंधी सुरक्षा उपाय शामिल थे। इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए अंतिम पॉलिसी तैयार की गई है।
परिवहन विभाग ने सभी एग्रीगेटर कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे पॉलिसी के अनुसार अपने कर्मचारियों और पार्टनर ड्राइवरों के लिए आवश्यक प्रबंध करें। अधिकारीयों ने कहा कि पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले एग्रीगेटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा, स्थिरता और अधिकारों की गारंटी मिलेगी। इसके अलावा, यह पॉलिसी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और गिग वर्कर्स के बीच पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद करेगी।
सरकार का यह भी कहना है कि गिग वर्कर्स की शिकायतों और सुझावों पर नियमित समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पॉलिसी में सुधार भी किया जाएगा। इससे प्रदेश में डिजिटल गिग सेक्टर का संतुलित और सुरक्षित विकास सुनिश्चित होगा।
गिग वर्कर्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को अब 30 दिन के भीतर पॉलिसी के अनुरूप सभी कार्यवाही पूरी करनी होगी। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम प्रदेश में गिग इकॉनमी को सुरक्षित, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
