चित्तौड़गढ़ में जाम की मार, 10 दिनों से यातायात और जनजीवन प्रभावित, 8 घंटे तक फंसे रहते हैं लोग
चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा-मंगलवाड़ राजमार्ग पर स्थित चिकारड़ा कस्बा इन दिनों जाम की समस्या से जूझ रहा है। यह राजमार्ग अब यात्रियों के लिए आसान सफर का साधन नहीं बल्कि यातना बन गया है। पिछले 10 दिनों से रोजाना 2 से 8 घंटे तक का भीषण जाम लग रहा है, जिससे न केवल स्थानीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की गति भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जाम की मुख्य वजह सड़क किनारे और नालियों पर अवैध रूप से बने पक्के निर्माण, दुकानें और मकान हैं। कस्बे के मुख्य हिस्से में यह अतिक्रमण यात्रियों और भारी वाहनों के लिए मार्ग को सीमित कर देता है। लोग शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यात्री भी इस स्थिति से परेशान हैं। बस और ट्रक चालक बताते हैं कि जाम के कारण उनका समय बर्बाद हो रहा है और कई बार उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में 3-4 घंटे की अतिरिक्त देरी हो रही है। वहीं, मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि जाम के कारण आपातकालीन मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो रहा है, जिससे जान जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द सड़क किनारे अतिक्रमण हटाकर यातायात सुचारू किया जाए। उनके अनुसार, अगर जाम की समस्या बनी रही, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमण हटाने और सड़क विस्तार के लिए कार्रवाई की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही टीम मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेगी और उचित कदम उठाएगी। इसके अलावा, पुलिस ने भी जाम को कम करने के लिए मार्ग पर अतिरिक्त पेट्रोलिंग शुरू की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कस्बों में जाम की समस्या अक्सर अतिक्रमण, सड़क की संकीर्णता और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न होती है। उनका सुझाव है कि प्रशासन को न केवल अतिक्रमण हटाने पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, ट्रैफिक नियंत्रण और पार्किंग व्यवस्था जैसी स्थायी योजनाएं लागू करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जाम के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। दुकानदार, विद्यार्थी और कर्मचारियों को रोजाना असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। लोग आशा कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालकर उनके जीवन में सामान्यता लौटाए।
यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए, तो चिकारड़ा कस्बा यातायात और जनजीवन के लिहाज से पूरी तरह से अतिक्रमण और जाम की गिरफ्त में आ सकता है। इसलिए, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करना बेहद जरूरी है।
