सवाई माधोपुर में बाघों की संख्या 76 पार, बढ़ती आबादी बनी चुनौती; नए ठिकानों की तलाश शुरू
राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर क्षेत्र में बाघों की संख्या लगातार बढ़कर 76 से अधिक पहुंच गई है, जिससे वन विभाग और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। क्षमता से अधिक बाघों की मौजूदगी अब उनके प्राकृतिक आवास के संतुलन पर असर डाल रही है।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में सीमित जंगल और संसाधनों के बीच टाइगर की बढ़ती आबादी से आपसी संघर्ष और क्षेत्रीय वर्चस्व की समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या उसकी वहन क्षमता से अधिक हो जाती है, तो इससे उनके व्यवहार और सुरक्षा दोनों पर प्रभाव पड़ सकता है।
बढ़ती संख्या से बढ़ी चुनौतियां
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की बढ़ती संख्या के कारण शिकार क्षेत्र सीमित हो रहा है, जिससे कई बार टाइगर एक-दूसरे के इलाकों में प्रवेश करने लगते हैं। इससे आपसी संघर्ष की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
नए ठिकानों की तलाश में वन विभाग
स्थिति को देखते हुए वन विभाग अब बाघों के लिए नए आवास क्षेत्रों की तलाश में जुट गया है। इसके तहत अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों और टाइगर रिजर्व्स में बाघों के ट्रांसलोकेशन (स्थानांतरण) की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार, यह कदम न केवल बाघों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना तैयार की जा रही है।
पर्यटन और संरक्षण दोनों पर असर
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां हर साल हजारों पर्यटक बाघों को देखने आते हैं। बाघों की बढ़ती संख्या से एक ओर जहां पर्यटन को बढ़ावा मिला है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों पर दबाव भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलन बनाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
