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सम के मखमली धोरे बने जैसलमेर की पहचान, देश-विदेश से उमड़ रहे हजारों पर्यटक

सम के मखमली धोरे बने जैसलमेर की पहचान, देश-विदेश से उमड़ रहे हजारों पर्यटक
 
सम के मखमली धोरे बने जैसलमेर की पहचान, देश-विदेश से उमड़ रहे हजारों पर्यटक

थार मरुस्थल की गोद में बसे जैसलमेर की पहचान अब केवल ऐतिहासिक किलों और हवेलियों तक सीमित नहीं रही है। सम के मखमली धोरे आज स्वर्णनगरी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक अलग और खास स्थान दिला रहे हैं। हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक जैसलमेर के ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ सम के रेतीले धोरों का रुख कर मरुस्थलीय सौंदर्य का अनूठा अनुभव लेने पहुंच रहे हैं।

सूर्यास्त के समय सुनहरी रेत पर पड़ती सूरज की किरणें जब पूरे इलाके को स्वर्णिम आभा से भर देती हैं, तो यह नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। दूर-दूर तक फैले रेत के ऊंचे-नीचे धोरे, ऊंट की सवारी, लोक संगीत और राजस्थानी संस्कृति की झलक सम को खास बनाती है। यही वजह है कि सम अब जैसलमेर पर्यटन का प्रमुख आकर्षण केंद्र बन चुका है।

पर्यटन विभाग के अनुसार, सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटक विशेष रूप से डेजर्ट सफारी, कैंपिंग और लोक संस्कृति कार्यक्रमों में रुचि दिखाते हैं।

सम में ऊंट सफारी, जीप सफारी और नाइट कैंपिंग पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। शाम ढलते ही टेंट सिटी में लोक कलाकारों द्वारा कालबेलिया नृत्य, मांड गीत और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियां माहौल को जीवंत बना देती हैं। स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और रेगिस्तान की ठंडी हवाएं पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करती हैं।

स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि सम के पर्यटन से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। होटल, रिसॉर्ट, टेंट सिटी, गाइड, ऊंट संचालक और हस्तशिल्प विक्रेताओं की आजीविका पर्यटन पर ही निर्भर है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

हालांकि, बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक धोरों की सुंदरता बनाए रखने के लिए सतत पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है। प्लास्टिक कचरे पर रोक और व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।

स्पष्ट है कि सम के मखमली धोरे केवल रेत के टीले नहीं, बल्कि जैसलमेर की पहचान और आर्थिक विकास का आधार बन चुके हैं। आने वाले समय में यदि इन्हें सुव्यवस्थित और सुरक्षित रखा जाए, तो सम विश्व पर्यटन मानचित्र पर और भी चमक सकता है।