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IPD टावर में फॉल्ट से नहीं गुल होगी बिजली, बनेगा हाईटेक GIS सबस्टेशन ग्रिड; जेडीए खर्च करेगा 1.62 करोड़ रुपए

IPD टावर में फॉल्ट से नहीं गुल होगी बिजली, बनेगा हाईटेक GIS सबस्टेशन ग्रिड; जेडीए खर्च करेगा 1.62 करोड़ रुपए
 
IPD टावर में फॉल्ट से नहीं गुल होगी बिजली, बनेगा हाईटेक GIS सबस्टेशन ग्रिड; जेडीए खर्च करेगा 1.62 करोड़ रुपए

आईपीडी टावर में बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए हाईटेक तकनीक पर आधारित जीआईएस (GIS) सबस्टेशन ग्रिड बनाया जाएगा। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) इस परियोजना पर करीब 1.62 करोड़ रुपए खर्च करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को कम करना और फॉल्ट की स्थिति में पूरे सिस्टम पर पड़ने वाले असर को सीमित करना है।

नई तकनीक के इस्तेमाल से आईपीडी टावर में बिजली आपूर्ति पहले के मुकाबले अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। मौजूदा बिजली व्यवस्था में किसी हिस्से में खराबी आने पर आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है। हाईटेक ग्रिड बनने के बाद बिजली वितरण प्रणाली को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

क्या है GIS सबस्टेशन तकनीक?

जीआईएस यानी गैस इंसुलेटेड स्विचगियर ऐसी तकनीक है, जिसमें बिजली के स्विचिंग उपकरणों को गैस-इंसुलेटेड बंद आवरण में रखा जाता है। सामान्य सबस्टेशन की तुलना में इस तकनीक में कम जगह की जरूरत पड़ सकती है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन स्थानों पर उपयोगी होती है, जहां सीमित जगह में बिजली आपूर्ति के लिए आधुनिक उपकरण लगाने की आवश्यकता होती है।

जीआईएस सबस्टेशन में उपकरण सुरक्षित आवरण के भीतर होने के कारण बाहरी वातावरण के प्रभाव से बचाव में मदद मिलती है। इससे सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने और नियमित रखरखाव की जरूरत कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, किसी भी विद्युत प्रणाली की तरह इसमें भी समय-समय पर तकनीकी जांच और जरूरी सर्विस की आवश्यकता हो सकती है।

1.62 करोड़ रुपए में तैयार होगा ग्रिड

इस परियोजना के लिए जेडीए की ओर से 1.62 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। ग्रिड तैयार होने के बाद आईपीडी टावर की बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है। आधुनिक उपकरणों के जरिए बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करने और तकनीकी खराबियों से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के पूरा होने की समयसीमा, निर्माण शुरू होने की तारीख और ग्रिड की क्षमता से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इन विवरणों के सामने आने के बाद परियोजना के तकनीकी स्वरूप और इससे होने वाले लाभों की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

बिजली आपूर्ति में सुधार की उम्मीद

आईपीडी टावर जैसी बड़ी इमारत में निर्बाध बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण होती है। बिजली बाधित होने से लिफ्ट, रोशनी, एयर कंडीशनिंग और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में आधुनिक सबस्टेशन व्यवस्था से बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, किसी एक ग्रिड के निर्माण से बिजली गुल होने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी, यह कहना तकनीकी व्यवस्था और बैकअप सिस्टम की जानकारी के बिना संभव नहीं है। परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए ग्रिड को मौजूदा बिजली नेटवर्क से किस तरह जोड़ा जाता है और फॉल्ट की स्थिति में वैकल्पिक आपूर्ति की क्या व्यवस्था रहती है।