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खाटूश्यामजी मंदिर में बसंत पंचमी पर पीला वस्त्र बांटने की परंपरा नहीं, कमेटी ने स्पष्ट किया

खाटूश्यामजी मंदिर में बसंत पंचमी पर पीला वस्त्र बांटने की परंपरा नहीं, कमेटी ने स्पष्ट किया
 
खाटूश्यामजी मंदिर में बसंत पंचमी पर पीला वस्त्र बांटने की परंपरा नहीं, कमेटी ने स्पष्ट किया

खाटूश्यामजी के प्रसिद्ध श्याम मंदिर में बसंत पंचमी के दिन पीला वस्त्र बांटने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय चर्चाओं में भ्रम फैल गया था। मंदिर कमेटी ने इस पर स्पष्ट किया है कि पीला वस्त्र बांटने की कोई परंपरा या धार्मिक प्रथा मंदिर में नहीं है। कमेटी ने कहा कि इस तरह की अफवाहें पूरी तरह से निराधार हैं और श्रद्धालुओं को बिना पुष्टि के ऐसी बातें फैलाने से बचना चाहिए।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, हर साल बसंत पंचमी पर मंदिर में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, लेकिन पीले वस्त्र बांटना मंदिर की मान्यता में शामिल नहीं है। कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर यह तस्वीरें और पोस्ट साझा की गई थीं, जिससे भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने कहा, “हम सभी श्रद्धालुओं से अपील करते हैं कि मंदिर की परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में केवल आधिकारिक जानकारी ही मानें।”

जानकारी के अनुसार, खाटूश्यामजी मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा, प्रसाद वितरण और भक्तजन सभा का आयोजन होता है। पीले वस्त्र बांटना कभी भी मंदिर की प्रथा का हिस्सा नहीं रहा है। मंदिर कमेटी ने सोशल मीडिया पोस्ट और अफवाह फैलाने वाले समूहों के खिलाफ सतर्क रहने की चेतावनी भी दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर बिना पुष्टि के अफवाहें फैलाना न केवल सामाजिक रूप से भ्रम पैदा करता है, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच असमंजस और अनावश्यक विवाद भी उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में मंदिर प्रशासन की आधिकारिक घोषणाओं पर ही विश्वास करना चाहिए।

मंदिर में आने वाले भक्तजन भी कमेटी के इस स्पष्टिकरण का स्वागत कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि सोशल मीडिया पर देखा गया यह भ्रम उन्हें भी परेशान कर रहा था। उन्होंने कहा कि सही जानकारी मिलने के बाद अब वे निश्चिंत हैं और बसंत पंचमी की पूजा और भजन में हिस्सा लेने के लिए मंदिर आएंगे।

मंदिर प्रशासन ने आगे कहा कि भविष्य में किसी भी धार्मिक आयोजन को लेकर भ्रांतिपूर्ण जानकारी फैलाने से रोकने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से नियमित अपडेट दिए जाएंगे। साथ ही, श्रद्धालुओं को भी यह सुझाव दिया गया है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

इस तरह की स्पष्टिकरणी पहल ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक स्थलों पर परंपराओं और रीति-रिवाजों को लेकर सत्यापित जानकारी का ही पालन करना आवश्यक है, ताकि भक्तों में भ्रम और अफवाहें न फैलें।

खाटूश्यामजी मंदिर की यह पहल स्थानीय समाज और भक्तों के बीच विश्वास बढ़ाने और धार्मिक आयोजनों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।