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नागपुर में बोले मोहन भागवत: दुनिया शरीर, मन और बुद्धि के समग्र विकास का मॉडल देने में रही असफल

नागपुर में बोले मोहन भागवत: दुनिया शरीर, मन और बुद्धि के समग्र विकास का मॉडल देने में रही असफल
 
नागपुर में बोले मोहन भागवत: दुनिया शरीर, मन और बुद्धि के समग्र विकास का मॉडल देने में रही असफल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया मानव शरीर, मन और बुद्धि के विकास को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझती है, लेकिन अब तक ऐसा प्रभावी ढांचा विकसित नहीं कर पाई है जो इन तीनों का एक साथ और संतुलित विकास सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि समग्र व्यक्तित्व निर्माण के लिए इन तीनों आयामों का सामंजस्य आवश्यक है।

नागपुर में RSS के एक प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आधुनिक दुनिया ने विज्ञान, तकनीक और भौतिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को एकीकृत रूप से विकसित करने की दिशा में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि केवल शारीरिक विकास या बौद्धिक उन्नति पर्याप्त नहीं है। यदि मन, विचार और आचरण में संतुलन नहीं होगा तो व्यक्ति और समाज दोनों के सामने समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। इसलिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जो शरीर, मन और बुद्धि के समन्वित विकास पर बल दे।

भारतीय दृष्टिकोण पर दिया जोर

भागवत ने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा मानव जीवन को समग्रता में देखने की बात करती है। इसमें व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास को समान महत्व दिया जाता है। उनका कहना था कि इसी दृष्टिकोण के आधार पर समाज और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने, सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में योगदान देने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन

नागपुर में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में देश के विभिन्न हिस्सों से आए स्वयंसेवकों ने भाग लिया। शिविर के दौरान शारीरिक प्रशिक्षण, बौद्धिक सत्र और संगठनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। समापन समारोह में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

भागवत के इस संबोधन को संघ के समग्र व्यक्तित्व निर्माण और भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित दृष्टिकोण की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानव विकास का सही मॉडल वही होगा जो शरीर, मन और बुद्धि के बीच संतुलन स्थापित करते हुए व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाए।