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“घूंघट हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं”, मॉडल रुचि गुर्जर के बयान पर छिड़ी बहस

 
“घूंघट हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं”, मॉडल रुचि गुर्जर के बयान पर छिड़ी बहस

रुचि गुर्जर ने जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान घूंघट और पर्दा प्रथा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि घूंघट की परंपरा भारत की मूल संस्कृति का हिस्सा नहीं रही, बल्कि यह मुगलों के समय में समाज में आई। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर बहस शुरू हो गई है।रुचि गुर्जर ने कहा, “पर्दा प्रथा या घूंघट मुगलों के समय से ही आया है। इससे पहले कहीं भी यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं था। देवी-देवताओं की तस्वीरों और धार्मिक ग्रंथों में भी इसकी झलक नहीं दिखाई देती। इसलिए घूंघट को हमारी असली संस्कृति कहना सही नहीं होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को हमेशा शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल में महिलाएं शिक्षा, राजनीति और समाज के कई क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती थीं। ऐसे में घूंघट जैसी परंपराओं को महिलाओं की पहचान से जोड़ना उचित नहीं है।

रुचि के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं और इसे महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि घूंघट कई समुदायों की परंपरा और सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए इस पर किसी एक नजरिए से टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।राजस्थान जैसे राज्यों में आज भी कई ग्रामीण इलाकों में घूंघट प्रथा प्रचलित है। हालांकि बदलते समय के साथ नई पीढ़ी में इसे लेकर सोच भी बदल रही है। शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के साथ महिलाएं अब कई सामाजिक बंधनों को चुनौती देती नजर आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की संस्कृति बेहद विविधतापूर्ण रही है और अलग-अलग समय में कई परंपराएं समाज में जुड़ती चली गईं। इतिहासकारों के अनुसार पर्दा प्रथा का प्रभाव मध्यकाल में बढ़ा, लेकिन इसे लेकर अलग-अलग मत भी मौजूद हैं।फिलहाल रुचि गुर्जर का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके बयान ने एक बार फिर परंपरा, संस्कृति और महिलाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।