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राजस्थान समेत पूरे देश में बढ़ रहा एक्सट्रीम वेदर का खतरा

 
राजस्थान समेत पूरे देश में बढ़ रहा एक्सट्रीम वेदर का खतरा

सम की असामान्य गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी गई है। हीटवेव, कोल्ड वेव, बिजली गिरना, तूफान, चक्रवात, बादल फटना, बाढ़ और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक घटनाएं अब आम हो गई हैं और ये सभी एक्सट्रीम वेदर के परिणाम हैं।

हीटवेव और कोल्ड वेव दोनों ही राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों में गंभीर असर डाल रहे हैं। गर्मियों में तापमान का असामान्य रूप से बढ़ जाना लोगों के स्वास्थ्य और कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। वहीं सर्दियों में अचानक कोल्ड वेव के आने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

राजस्थान में हाल ही में कुछ जिलों में हीटवेव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इससे किसानों की फसलें प्रभावित हुईं और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी तरह, उत्तर भारत में शीतलहर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बिजली गिरने और तूफान के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आकाशीय बिजली गिरने से मानव जीवन और पशुपालन दोनों पर खतरा बढ़ता है। तूफान और चक्रवात समुद्री तट और आसपास के इलाकों में भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण एक्सट्रीम वेदर की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ते प्रदूषण और जंगलों की कटाई ने भी इस प्रक्रिया को तेज किया है। इसके चलते अब मौसम की अनिश्चितता ने सरकारों, प्रशासन और आम जनता के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

राज्य और केंद्र सरकारें भी इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं। आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय किया जा रहा है और ग्रामीण इलाकों में राहत सामग्री और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी सावधानी और तैयारी बरतनी होगी।

वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों और गरीब वर्ग को उठाना पड़ता है। इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि जल संरक्षण, सतत कृषि और सुरक्षित निर्माण जैसी उपायों को अपनाना जरूरी है।

कुल मिलाकर, राजस्थान समेत पूरे देश में एक्सट्रीम वेदर अब केवल मौसम की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बन गया है। इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता हर स्तर पर महसूस की जा रही है।