पोखरण-II से जुड़े वैज्ञानिक की टीम का बड़ा दावा, मर्करी से बनाया 23.77 कैरेट सोना! अब MNIT करेगा जांच
सोने की कीमतों के बीच पारे यानी मर्करी से सोना बनाने का दावा चर्चा में आ गया है। पोखरण-II परमाणु परीक्षण से जुड़े एक वैज्ञानिक की टीम द्वारा की जा रही रिसर्च के दौरान कथित तौर पर 23.77 कैरेट सोना तैयार करने की बात सामने आई है। अब इस दावे की वैज्ञानिक जांच के लिए मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT), जयपुर की भूमिका अहम मानी जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि तैयार किए गए पदार्थ की वास्तविक संरचना क्या है और क्या वह निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है।
मर्करी से सोना बनाने का दावा क्यों चर्चा में?
पारा यानी मर्करी एक रासायनिक तत्व है, जबकि सोना एक अलग तत्व है। सामान्य रासायनिक प्रक्रियाओं से पारे को सोने में बदलना संभव नहीं है, क्योंकि दोनों तत्वों के परमाणुओं की संरचना अलग होती है। किसी एक तत्व को दूसरे तत्व में बदलने के लिए परमाणु नाभिक में बदलाव करना पड़ता है, जिसे परमाणु रूपांतरण कहा जाता है।
वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में परमाणु रूपांतरण के जरिए एक तत्व को दूसरे तत्व में बदला जा सकता है। हालांकि, ऐसी प्रक्रिया अत्यंत जटिल और महंगी होती है। इसलिए मर्करी से सोना बनाने के दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है।
23.77 कैरेट शुद्धता का दावा
इस मामले में तैयार पदार्थ को 23.77 कैरेट सोना बताया जा रहा है। आम तौर पर 24 कैरेट सोने को लगभग शुद्ध सोने के रूप में जाना जाता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं भी मिली होती हैं। ऐसे में 23.77 कैरेट का दावा काफी उच्च शुद्धता की ओर संकेत करता है।
लेकिन किसी पदार्थ को सोना मानने और उसकी शुद्धता तय करने के लिए केवल रंग, चमक या शुरुआती परीक्षण पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए मान्य वैज्ञानिक उपकरणों और परीक्षण विधियों से उसकी रासायनिक संरचना का विश्लेषण करना जरूरी है। यह भी जांचना होगा कि नमूने में वास्तव में सोना मौजूद है या किसी दूसरी धातु अथवा मिश्रण को सोना समझा जा रहा है।
MNIT की जांच से स्पष्ट होगी वास्तविकता
दावे की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए MNIT में होने वाली जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रयोगशाला परीक्षण से पदार्थ में मौजूद तत्वों की पहचान और उनकी मात्रा का पता लगाया जा सकता है। यदि परीक्षण में सोने की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो भी यह निर्धारित करने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक साक्ष्य जरूरी होंगे कि सोना वास्तव में मर्करी से ही तैयार हुआ है।
इसके लिए प्रयोग की पूरी प्रक्रिया, इस्तेमाल किए गए पदार्थों, उपकरणों और परीक्षण के दौरान दर्ज किए गए परिणामों की जांच आवश्यक होगी। स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा दोहराए जा सकने वाले परिणाम किसी भी असाधारण वैज्ञानिक दावे की विश्वसनीयता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वैज्ञानिक पुष्टि के बाद ही निकलेगा निष्कर्ष
मर्करी से सोना बनाने का दावा वैज्ञानिक जगत के लिए असाधारण है। इसलिए इसे प्रमाणित खोज मानने से पहले प्रयोगशाला की रिपोर्ट और शोध के विस्तृत निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर 23.77 कैरेट सोना तैयार करने की बात को दावा ही माना जाना चाहिए। MNIT की जांच रिपोर्ट, प्रयोग की प्रक्रिया और स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह वास्तव में नई वैज्ञानिक उपलब्धि है या शुरुआती परीक्षण के परिणामों की आगे जांच की आवश्यकता है।
