Aapka Rajasthan

राजस्थान हाईकोर्ट पर भडका सुप्रीम कोर्ट, फुटेज में जानें दहेज-हत्या के मामले में 23 साल तक ट्रायल नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट पर भडका सुप्रीम कोर्ट, फुटेज में जानें दहेज-हत्या के मामले में 23 साल तक ट्रायल नहीं
 
राजस्थान हाईकोर्ट पर भडका सुप्रीम कोर्ट, फुटेज में जानें दहेज-हत्या के मामले में 23 साल तक ट्रायल नहीं

भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका ने राजस्थान हाईकोर्ट की रोक के चलते 23 साल से लंबित दहेज हत्या के मामले में ट्रायल नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और हाईकोर्ट से जवाब मांगते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि इतनी लंबी देरी न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और पीड़ित परिवार के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत बड़ा नुकसान है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट से पूछा कि आखिर 23 वर्षों से ट्रायल क्यों नहीं हो सका। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि न्याय की देरी न्याय से इनकार के समान है। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि लंबित मामलों में देरी की जिम्मेदारी किसकी है और इसे शीघ्रता से निपटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह मामला दहेज हत्या का है, जिसमें पीड़िता की मौत के पीछे पति और उसके परिवार पर गंभीर आरोप हैं। मामला दर्ज होने के बाद विभिन्न कानूनी अड़चनों और हाईकोर्ट की रोक के कारण ट्रायल 23 साल तक शुरू नहीं हो पाया। पीड़ित परिवार ने लगातार न्याय की मांग की, लेकिन लंबे समय तक सुनवाई नहीं होने से परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और राजस्थान हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे पूरी देरी का कारण स्पष्ट करें और 23 साल पुराने मामले को जल्द से जल्द ट्रायल के लिए तैयार करें। अदालत ने कहा कि अगर न्यायालय और सरकार मिलकर सही कदम नहीं उठाएंगे, तो यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में दहेज हत्या के मामलों में लंबित ट्रायल एक गंभीर समस्या है। ऐसे मामलों में देरी न केवल पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित करती है, बल्कि अपराधियों को भी असंवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख इस दिशा में एक चेतावनी है कि लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाए।

राजस्थान हाईकोर्ट और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की जांच में तेजी लाने का आश्वासन दिया है। अधिकारी बता रहे हैं कि ट्रायल शीघ्र शुरू करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर काम चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी ने पूरे देश में न्यायपालिका और सरकार के प्रति जागरूकता बढ़ा दी है। यह मामला यह संदेश देता है कि लंबित मामलों की अनदेखी अब सहन नहीं की जाएगी और न्याय पाने के लिए परिवारों को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

इस घटना ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता और लंबित मामलों के त्वरित निपटान की महत्ता को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यदि राज्य और न्यायालय समय पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो उच्चतम न्यायालय को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ेगा, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जा सके।