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राजस्थान हाईकोर्ट ने रेट की कार्यप्रणाली पर जताई गंभीर चिंता, वीडियो में देंखे रजिस्ट्रार से मांगा स्पष्टीकरण

राजस्थान हाईकोर्ट ने रेट की कार्यप्रणाली पर जताई गंभीर चिंता, वीडियो में देंखे रजिस्ट्रार से मांगा स्पष्टीकरण
 
राजस्थान हाईकोर्ट ने रेट की कार्यप्रणाली पर जताई गंभीर चिंता, वीडियो में देंखे रजिस्ट्रार से मांगा स्पष्टीकरण

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस आनंद शर्मा की बैंच ने रेट की कार्यशैली और उस पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण मांगा है।

यह आदेश अदालत ने श्रवण लाल खोवाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि रेट ने अपने आदेश में हेराफेरी की है और न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता युवराज सामंत ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि रेट ने ओपन कोर्ट में याचिकाकर्ता के पक्ष में स्टे (अस्थायी रोक) दिया था, लेकिन बाद में किसी अन्य दिन की सुनवाई दिखाते हुए स्टे आदेश देने से इनकार कर दिया। इस तरह की कार्यप्रणाली के चलते याचिकाकर्ता को न्याय मिलने में गंभीर रुकावट आई।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। जस्टिस आनंद शर्मा ने रेट की कार्यप्रणाली और उनके आदेशों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए और रजिस्ट्रार से आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अपील अधिकरणों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि होती है। किसी भी तरह की अनियमितता या आदेश में हेराफेरी न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण होता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से संचालित किया जा सके।

युवराज सामंत ने कोर्ट में यह भी बताया कि याचिकाकर्ता की सुनवाई में देरी और आदेशों की बदलती स्थिति ने न्याय मिलने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। उन्होंने रेट के इस रवैये को न्याय प्रक्रिया में असामान्य और अनुचित बताया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सुनवाई और आदेश देने की प्रक्रिया पूरी तरह से न्यायसंगत और पारदर्शी होनी चाहिए। रेट को निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता और अदालत को सभी आवश्यक स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए।

वहीं, अधिवक्ता और याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय की देखरेख में सुधार नहीं किया गया, तो इससे अपील अधिकरण के सभी निर्णयों की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। न्यायालय ने इस मामले में तत्काल रिपोर्ट पेश करने के लिए रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला राजस्थान में राज्य स्तरीय न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है। अपील अधिकरणों में सुनवाई और आदेश प्रक्रिया में सुधार की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट की यह कार्रवाई न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने और नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।