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वीडियो में देखें आवारा कुत्तों को लेकर राजस्थान सरकार की नई गाइडलाइन जारी, 6 महीने से छोटे कुत्तों की नहीं होगी नसबंदी

वीडियो में देखें आवारा कुत्तों को लेकर राजस्थान सरकार की नई गाइडलाइन जारी, 6 महीने से छोटे कुत्तों की नहीं होगी नसबंदी
 
वीडियो में देखें आवारा कुत्तों को लेकर राजस्थान सरकार की नई गाइडलाइन जारी, 6 महीने से छोटे कुत्तों की नहीं होगी नसबंदी

राजस्थान में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। स्वायत्त शासन विभाग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया। इसके तहत 13 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें कुत्तों को पकड़ने और उनकी देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं शामिल हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार, छह महीने से कम उम्र के पिल्लों को नसबंदी के लिए नहीं पकड़ा जाएगा। यही नहीं, यदि किसी मादा कुत्ते के साथ पिल्ले हैं तो उसे भी पकड़ने से छूट दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रावधान से कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता और पशु अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।

गाइडलाइन में साफ किया गया है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय तरीके से की जाएगी। इस दौरान उनके साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं बरती जाएगी। कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी, और उनके लिए सुरक्षित वाहन एवं उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

स्वायत्त शासन विभाग ने सभी नगर निगमों और निकायों को आदेश दिया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। साथ ही, स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सकों की निगरानी में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था की जाए। टीकाकरण के बाद कुत्तों के कान पर विशेष निशान लगाया जाएगा, ताकि भविष्य में पहचान की जा सके।

गाइडलाइन में यह भी उल्लेख है कि किसी भी परिस्थिति में कुत्तों को मारा नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि आवारा कुत्तों के साथ क्रूरता असंवैधानिक और गैरकानूनी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण पर जोर दिया है। राजधानी जयपुर सहित कई शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आए दिन बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस वजह से लोगों में भय का माहौल भी है। ऐसे में सरकार का मानना है कि यह गाइडलाइन समस्या के समाधान की दिशा में कारगर साबित होगी।

सामाजिक संगठनों और पशु प्रेमियों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे एक ओर जहां इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं कुत्तों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाएगा। वहीं, कुछ नागरिकों का मानना है कि केवल गाइडलाइन जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इनके सख्त पालन पर भी ध्यान देना होगा।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में शहरी निकायों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, आवारा कुत्तों के लिए अस्थायी शेल्टर और खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाएगी।