राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर सियासी संग्राम तेज, वीडियो में जाने चुनाव और एडहॉक कमेटी को लेकर विधानसभा में हंगामा
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पिछले दो वर्षों से मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर बनाई गई एडहॉक कमेटी के मुद्दे पर विपक्ष ने विधानसभा में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। साथ ही आरसीए को ट्रस्ट बनाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया।
शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरसीए के चुनाव हुए दो साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नई कार्यकारिणी के चुनाव नहीं कराए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार कब तक चुनाव टालती रहेगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोके रखेगी।
जूली ने कहा कि सवाई मानसिंह स्टेडियम में राजस्थान सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आरसीए की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेल संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है।
इस बीच यह भी चर्चा है कि Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) आरसीए की मौजूदा स्थिति को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। सूत्रों के मुताबिक, यदि संगठनात्मक ढांचे और चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं आई तो बीसीसीआई राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विपक्ष का कहना है कि आरसीए को ट्रस्ट में बदलने का प्रस्ताव खेल प्रशासन को राजनीतिक नियंत्रण में लेने की कोशिश है। उनका तर्क है कि इससे खिलाड़ियों और खेल गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सत्तापक्ष का कहना है कि सभी कदम नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उठाए जा रहे हैं।
राजस्थान में क्रिकेट की लोकप्रियता को देखते हुए यह विवाद खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि बीसीसीआई की ओर से कोई कठोर कदम उठाया जाता है तो राज्य में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल, आरसीए को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।
