निकाय चुनाव-2026 में बदली तस्वीर, दो से ज्यादा बच्चों वाले भी मैदान में; पुराने दावेदारों को मिला मौका
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव-2026 को लेकर चुनावी तस्वीर इस बार बदली हुई नजर आ रही है। दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी हटने के बाद अब ऐसे कई संभावित उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में उतर रहे हैं, जो पहले इस नियम के कारण चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे।
राज्य सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया में हुए बदलाव के बाद अब नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों की पात्रता तय करते समय संतानों की संख्या को आधार नहीं बनाया जा रहा है। इससे स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिला है।
पहले राजस्थान नगरपालिका कानून के तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते थे। यह प्रावधान वर्ष 1995 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना बताया गया था। अब बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।
इस बदलाव का असर निकाय चुनावों में दिखाई देने लगा है। कई वार्डों में ऐसे उम्मीदवार भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं, जो पहले नियमों के कारण चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे थे। राजनीतिक दल भी अब ज्यादा विकल्पों के साथ प्रत्याशियों का चयन कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या और दावेदारों की सूची में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को भी मौका मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे कई वार्डों में चुनावी मुकाबला रोचक हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से निकाय चुनावों में उम्मीदवारों का दायरा बढ़ेगा। हालांकि, अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी।
निकाय चुनाव-2026 में अब मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि पुराने अनुभवी चेहरों और नए दावेदारों के बीच भी देखने को मिल सकता है। बदले नियमों के कारण इस बार चुनावी मैदान में प्रत्याशियों की तस्वीर पहले से अलग दिखाई दे रही है।
