‘अधूरी रह गई आखिरी ख्वाहिश…’, हादसे ने छीना पिता का साया, पत्नी और बच्चों में गम का माहौल
बूंदी जिले के लाखेरी इलाके में लबान-पापड़ी रोड पर ट्रक एक्सीडेंट में मारे गए सांगोद इलाके के करीरिया गांव के रहने वाले कालूलाल गुर्जर पिछले कई सालों से हर साल चौथ माता यात्रा के लिए पैदल जाते थे। इस बार कालूलाल शनिवार को अपने दोस्त के साथ पैदल निकले, लेकिन उनकी यात्रा अधूरी रह गई।
लबान के पास हुए एक्सीडेंट ने पूरे परिवार पर गहरा जख्म दिया, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। परिवार अपने तीन बच्चों पर आए दुख से टूट गया है। मृतक के बड़े भाई हरिओम गुर्जर ने बताया कि कालूलाल शनिवार को अपने साथी घाटल गांव के रहने वाले महावीर बैरवा के साथ गांव से निकले थे।
रविवार सुबह लबान के पास हुए एक्सीडेंट में उनकी मौत की खबर ने परिवार की खुशियां छीन लीं। कालूलाल सालों से मजदूरी कर रहे थे। उनके पास अपने परिवार का गुज़ारा करने के लिए पर्याप्त ज़मीन भी नहीं थी।
तीन भाइयों में मंझले बेटे कालूलाल के परिवार में सिर्फ़ पांच बीघा ज़मीन है। वह अपने परिवार से दूर पाली जिले की आशापुरा माताजी गौशाला में मजदूरी कर रहा था। वह शनिवार को पदयात्रा पर गांव आया था।
गांव वाले रामस्वरूप नागर ने बताया कि मृतक कालूलाल के तीन मासूम बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी पांच साल की और सबसे छोटा बेटा एक साल का है। हादसे ने तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया।
हादसे की खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया। कालूलाल की पत्नी सुनीता अपने छोटे बेटे को गोद में लिए रोते-रोते बेहोश हो गई, वहीं माता-पिता और भाई भी रो-रोकर बेहाल हो गए।
