चतुर्थ श्रेणी भर्ती में हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, शून्य और माइनस अंक वाले भी दावेदार
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती को लेकर गंभीर हैरानी जताई है। कोर्ट ने इस मामले में पाया कि चयन प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थी शून्य अंक पाने के बावजूद और कुछ माइनस अंक वाले अभ्यर्थी भी दावेदार बनाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्थिति चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है कि कैसे शून्य और माइनस अंक वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों से अन्य योग्य और मेहनती उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसके मद्देनजर हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे 10 दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया और नियमावली पर रिपोर्ट पेश करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गलतियां भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गहरा असर डालती हैं और भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
संपर्क में आए अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का पालन करने और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। हाईकोर्ट के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में चयन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाई जाएगी।
