नगर निगम हेरिटेज का मुख्यालय खुद हुआ जर्जर, फुटेज में देखें कमिश्नर के कमरे के बाहर की छत गिरी, मची अफरा-तफरी
जहां एक ओर जयपुर नगर निगम हेरिटेज मानसून और बारिश के मौसम में शहर की जर्जर इमारतों को सील कर उन्हें तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसका अपना मुख्यालय ही बदहाली की चपेट में आ गया है। सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में कमिश्नर निधि पटेल के कमरे के बाहर जर्जर हो चुकी छत का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि वहां मौजूद तीन होमगार्ड और कुछ ठेकेदार बाल-बाल बच गए।
हादसे का विवरण
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे का समय था, जब नगर निगम मुख्यालय की दूसरी मंजिल पर कमिश्नर कार्यालय के बाहर अचानक तेज आवाज के साथ प्लास्टर और मलबा नीचे गिरने लगा। वहां खड़े तीन होमगार्ड और कुछ ठेकेदारों ने शोर सुनते ही फुर्ती दिखाते हुए एक-दूसरे को पकड़कर तेजी से पीछे हटकर अपनी जान बचाई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि वे कुछ सेकंड भी देरी करते, तो गंभीर चोट लग सकती थी।
मुख्यालय की हालत चिंताजनक
नगर निगम हेरिटेज शहर में जर्जर इमारतों को खतरनाक घोषित कर उन्हें खाली कराने और ध्वस्त करने का अभियान चला रहा है, लेकिन उसका खुद का मुख्यालय वर्षों से मरम्मत और देखरेख के अभाव में बदहाल हो चुका है। इमारत के कई हिस्सों में दीवारों पर दरारें पड़ चुकी हैं, प्लास्टर झड़ रहा है और बरसात में पानी रिसाव की समस्या आम हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार इसकी मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन बजट और अनुमति के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ा।
हादसे के बाद बढ़ी चिंता
हादसे के बाद निगम कर्मचारियों और अधिकारियों में चिंता का माहौल है। सभी को यह डर सता रहा है कि अगर समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो बड़ा हादसा हो सकता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि मुख्यालय की पूरी इमारत का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जहां-जहां खतरा है, वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई हो।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद कमिश्नर निधि पटेल ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि छत और इमारत की अन्य कमजोर जगहों की तुरंत जांच कराई जाए और आवश्यक मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और आने-जाने वाले नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए जोखिम वाले हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
यह घटना नगर निगम हेरिटेज के लिए एक विडंबना बनकर सामने आई है। जहां निगम अपने अभियानों में शहर की कमजोर इमारतों को गिराकर लोगों की जान बचाने का दावा कर रहा है, वहीं उसका अपना मुख्यालय ही खतरे के घेरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगम अपनी इमारतों की समय-समय पर देखरेख और मरम्मत का कार्य सुनिश्चित करे, तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।
