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विधायक निधि में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, गाइडलाइन में किए 6 अहम बदलाव

विधायक निधि में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, गाइडलाइन में किए 6 अहम बदलाव
 
विधायक निधि में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, गाइडलाइन में किए 6 अहम बदलाव

विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमएलए-एलएडी) में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने गाइडलाइन में छह महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए नियम लागू होने के बाद विधायकों की भूमिका और कार्यों की अनुशंसा प्रक्रिया में कई बदलाव देखने को मिलेंगे।

बिना मांग के नहीं कर सकेंगे कार्यों की अनुशंसा

नई व्यवस्था के तहत अब विधायक किसी भी विकास कार्य की अनुशंसा बिना स्थानीय मांग या प्रस्ताव के नहीं कर सकेंगे। इससे विकास कार्यों को वास्तविक जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।

कार्यकारी एजेंसी का नाम नहीं लिख सकेंगे विधायक

सरकार ने गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया है कि विधायक अपने अनुशंसा पत्र में किसी कार्यकारी एजेंसी का नाम नहीं लिखेंगे। अब विकास कार्यों को कौन सी एजेंसी क्रियान्वित करेगी, इसका निर्णय जिला प्रशासन करेगा।

कलेक्टर और जिला परिषद सीईओ करेंगे चयन

नए नियमों के अनुसार कार्यकारी एजेंसी का चयन जिला कलेक्टर और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) द्वारा किया जाएगा। इससे एजेंसी चयन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिश

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से योजना में मनमानी, पक्षपात और कथित भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर रोक लगेगी। साथ ही विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी भी बेहतर हो सकेगी।

जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

नई गाइडलाइन में विकास कार्यों की अनुशंसा, स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है। इससे सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

विकास योजनाओं की निगरानी होगी मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित नियमों से विधायक निधि के तहत होने वाले कार्यों की निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इससे योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

सरकार के इस फैसले को विधायक निधि के उपयोग में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए नियमों के लागू होने के बाद विकास कार्यों की अनुशंसा और क्रियान्वयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।