जनता की ताकत के आगे सरकार नतमस्तक! खाचरियावास बोले - 'स्मार्ट मीटर पर बढ़ते विरोध और बिजली संकट के बीच लिया गया यू-टर्न'
राजस्थान में स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता हटा दी गई है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शुक्रवार को जयपुर में इसे जनता की जीत बताया।उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर एक बड़ा घोटाला है और जनता की जेब काटने वाला है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने इसका विरोध किया।
सरकार ने पुलिस और निजी कंपनी के कर्मचारियों की मदद से स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश की। लेकिन जनता के विरोध के कारण यह काम नहीं हो सका।खाचरियावास ने सरकार को भविष्य में इस तरह के मनमाने फैसले न लेने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने गुपचुप तरीके से स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश की, तो इसका भी विरोध किया जाएगा।
आपको बता दें कि राजस्थान सरकार ने नए बिजली कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता को फिलहाल हटा दिया है। इसके साथ ही, अब खराब और जले हुए मीटरों की जगह पुराने मीटर लगाए जा सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने स्मार्ट मीटर लगाने के दिशा-निर्देशों में बदलाव के आदेश जारी कर दिए हैं।
अब नए कनेक्शन और खराब या जले हुए मीटरों को बदलने के लिए अलग नियम लागू होंगे। 20 अगस्त को जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है या पूरा हो चुका है, वहाँ नए कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएँगे। खराब मीटरों को भी स्मार्ट मीटर से ही बदला जाएगा। लेकिन, बाकी जगहों पर अभी सामान्य (गैर-स्मार्ट) मीटर ही इस्तेमाल किए जाएँगे।
