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पहले बनाई ड्रग्स फैक्ट्री... फिर पाप उतारने के लिए की चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा से पहले पकड़ा गया

पहले बनाई ड्रग्स फैक्ट्री... फिर पाप उतारने के लिए की चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा से पहले पकड़ा गया
 
पहले बनाई ड्रग्स फैक्ट्री... फिर पाप उतारने के लिए की चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा से पहले पकड़ा गया

राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक मोस्ट वांटेड क्रिमिनल रमेश को गिरफ्तार किया है, जो ड्रग्स की फैक्ट्री चला रहा था। उसने पश्चिमी राजस्थान में MD ड्रग्स की फैक्ट्री लगाई थी, जिससे पूरे देश में ड्रग्स सप्लाई होती थी। बताया जा रहा है कि 12वीं क्लास का स्टूडेंट रमेश जेल में सज़ा काटते समय एक डॉक्टर के कॉन्टैक्ट में आया और फिर MD ड्रग्स बनाने लगा। पुलिस रेड में उसका पर्दाफाश होने के बाद, रमेश अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए चार धाम (तीर्थस्थल) गया। अब वह 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करने का प्लान बना रहा था। लेकिन, ANTF ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

चालाक रमेश के पास बिना मोबाइल फोन के भी बड़ा नेटवर्क
आरोपी रमेश बाड़मेर जिले का रहने वाला है और उसके खिलाफ 31 से ज़्यादा केस दर्ज हैं। ANTF के IG विकास कुमार ने बताया कि आरोपी राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना में MD ड्रग्स बनाने और सप्लाई करने का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। वह पहले भी कई राज्यों की जेलों में बंद रह चुका है। IG ने बताया कि आरोपी बहुत फुर्तीला था। वह कॉन्टैक्टलेस था और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी नहीं करता था। कुछ समय पहले जयपुर के बरकत नगर इलाके में उसके ठिकाने पर रेड पड़ी थी, लेकिन वह भाग गया था।

आरोपी कोलकाता में रहकर MD ड्रग की फैक्ट्री लगाने की कोशिश कर रहा था। उसके सप्लायर पुणे से जुड़े थे, और वह अक्सर हवाई यात्रा करता था। इस जानकारी के आधार पर ANTF ने कोलकाता, जयपुर और पुणे एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ा दी।

गंगासागर यात्रा से पहले गिरफ्तारी
जांच में पता चला कि बरकत नगर लोकेशन से जुड़े उसके हावड़ा और कोलकाता में भी ठिकाने थे, जहां रेड पड़ी। आरोपी कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में रहता था और धार्मिक यात्राओं की आड़ में अपना धंधा छिपा रहा था। उसने 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम और गंगासागर यात्रा की तैयारी पहले से कर रखी थी। उसने एक ट्रैवल एजेंट के ज़रिए गंगासागर यात्रा बुक की थी। इस जानकारी के आधार पर ANTF ने उसे हावड़ा में गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी पता चला कि 8वीं और 12वीं में फेल होने के बाद आरोपी ने स्कूल छोड़ दिया था। शुरुआत में वह गाड़ियां चुराता था, फिर शराब और ड्रग्स की तस्करी में शामिल हो गया। महाराष्ट्र की जेल में डॉ. बिरजू नाम के एक आरोपी से मिलने के बाद, उसने MD ड्रग्स बनाना सीखा और बिज़नेस शुरू कर दिया।

आरोपी ने राजस्थान में कई गैर-कानूनी MD फैक्ट्रियां लगाईं। वह अनिल, रमेश और रामलाल जैसे अलग-अलग नामों से काम करता था। असम और मणिपुर में भी उसकी एक्टिविटीज़ का पता चला है।

उसने MD ड्रग्स बनाने के लिए कम लागत वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।

उसने कॉस्टिक सोडा और एथिल अल्कोहल जैसे इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल करके 5 से 7 दिनों में MD ड्रग्स बनाने के लिए कम लागत वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। उसने लगभग ₹1 लाख की ड्रग्स को मार्केट में ₹30 लाख तक में बेचा। उसने अपनी काली कमाई से कई प्रॉपर्टीज़ भी बनाईं। हैरानी की बात है कि एग्जाम में फेल होने के बावजूद, उसने 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को केमिस्ट्री भी पढ़ाई।