चौमूं में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन का धरना सातवें दिन भी जारी, मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जयपुर जिले के चौमूं में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन का धरना शनिवार को सातवें दिन भी जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान और ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालक धरना स्थल पर जुटे रहे। यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार से जल्द बातचीत कर लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना दे रहे किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों का आरोप है कि मौजूदा नियमों और कार्रवाई के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने सरकार से ट्रैक्टरों और ट्रैक्टर-ट्रॉली से जुड़े मामलों में राहत देने की मांग की है।
ट्रैक्टरों को ब्लैकलिस्ट से हटाने की मांग
किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन की प्रमुख मांगों में ब्लैकलिस्ट किए गए ट्रैक्टरों को सूची से हटाना शामिल है। यूनियन का कहना है कि कई किसान अपने कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टरों पर निर्भर हैं। ऐसे में ट्रैक्टरों के ब्लैकलिस्ट होने से उनके रोजमर्रा के काम और आय पर असर पड़ रहा है।
किसानों ने सरकार से इस मामले में राहत देने और ब्लैकलिस्ट किए गए ट्रैक्टरों को दोबारा सामान्य प्रक्रिया में लाने की मांग की है।
ई-रवन्ना और चालान माफ करने की मांग
यूनियन की दूसरी प्रमुख मांग ई-रवन्ना और चालान से जुड़ी है। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पुराने ई-रवन्ना और चालानों के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इसलिए सरकार से इन्हें माफ करने की मांग की जा रही है।
यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार इन मामलों में राहत देती है तो बड़ी संख्या में किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों को फायदा मिलेगा।
भार क्षमता बढ़ाने की मांग
किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के नियमों में भी राहत चाहते हैं। यूनियन की मांग है कि बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली की भार क्षमता को 2.6 टन से बढ़ाकर 7 टन किया जाए।
यूनियन का तर्क है कि मौजूदा भार क्षमता कई मामलों में किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों के लिए व्यावहारिक नहीं है। क्षमता बढ़ाने से कृषि और परिवहन से जुड़े काम आसानी से किए जा सकेंगे।
सात दिन से जारी है आंदोलन
यूनियन का धरना लगातार सात दिनों से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर किसान और ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालक बड़ी संख्या में मौजूद रहकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर लंबे समय से सरकार और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने स्पष्ट किया है कि सरकार जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। यूनियन ने सरकार से जल्द बातचीत शुरू करने और लंबित मांगों का समाधान निकालने का आग्रह किया है।
किसानों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से यूनियन की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है और सात दिन से जारी यह आंदोलन कब समाप्त होता है।
