अजीब नामों से मिलेगी मुक्ति, वीडियो में देंखे शिक्षा विभाग का ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू
स्कूलों में पढ़ने वाले कई छात्रों को अपने नाम की वजह से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। घसीटाराम, नाहर, नन्नूमल, शैतान, खोजाराम जैसे नाम अक्सर मजाक का कारण बनते हैं। ऐसे ‘अटपटे’ और ‘अर्थहीन’ नामों से जूझ रहे बच्चों के लिए अब राहत की खबर है। शिक्षा विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत ऐसे छात्रों को नया, बेहतर और अर्थपूर्ण नाम चुनने का मौका दिया जाएगा, ताकि उन्हें स्कूल या समाज में किसी तरह की असहजता या शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े।
इस संबंध में संयुक्त शासन सचिव ने माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे स्कूल स्तर पर इस अभियान को लागू करें और जरूरतमंद छात्रों की पहचान कर उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करें।विभाग की ओर से इसके लिए एक विशेष सूची भी तैयार की गई है। इस सूची में कुल 2950 नाम शामिल हैं, जिन्हें छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें 1541 छात्राओं और 1409 छात्रों के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि हर नाम के साथ उसका अर्थ भी बताया गया है, ताकि अभिभावक समझदारी से अपने बच्चों के लिए उपयुक्त नाम का चयन कर सकें।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना है। कई बार नाम के कारण बच्चों को स्कूल में चिढ़ाया जाता है, जिससे उनके मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है। ऐसे में यह पहल उनके व्यक्तित्व विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नाम व्यक्ति की पहचान का अहम हिस्सा होता है। यदि नाम सकारात्मक और अर्थपूर्ण हो, तो यह बच्चों में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।हालांकि, नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक होगी और इसमें अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं डाला जाएगा।कुल मिलाकर, ‘सार्थक नाम अभियान’ शिक्षा विभाग की एक सराहनीय पहल मानी जा रही है, जो बच्चों को न सिर्फ एक बेहतर पहचान देगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई देगी।
