हाड़ौती में जल जीवन मिशन की परवन वृह्द पेयजल योजना का सपना अधूरा, टेंडर प्रक्रिया में उदासीनता जारी
हाड़ौती क्षेत्र के बारां, झालावाड़ और कोटा जिले के लोगों को घर-घर स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में सरकार की ओर से शुरू की गई जल जीवन मिशन की परवन वृह्द पेयजल योजना का सपना अब तक अधूरा ही है। परियोजना की स्वीकृति वर्ष 2021 में हुई थी, लेकिन करीब चार साल बाद भी योजना को जमीन पर उतारा नहीं जा सका है।
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के तहत बार-बार टेंडर प्रक्रिया को शुरू किया गया, लेकिन इसे फाइनल करने में लगातार उदासीनता दिखाई गई। अब तक तीन बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी भी चरण में फाइल अटकी हुई है और कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई। इस कारण लाखों लोगों को स्वच्छ जल की सुविधा मिलने में देरी हो रही है।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बार-बार टेंडर प्रक्रिया होने के बावजूद काम में ठहराव लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन में देरी से न केवल जनता की उम्मीदें ठेस पहुंच रही हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
वहीं, जल जीवन मिशन के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी जटिलताएं आ सकती हैं, जिसके कारण कार्यवाही में देरी हो रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, ताकि क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल उपलब्ध कराना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन स्तर के लिए बेहद जरूरी है। देरी और टेंडर प्रक्रिया में अनिश्चितता इस मिशन की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों ने सरकार और संबंधित विभाग से इस परियोजना की शीघ्रता से निगरानी और टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार टेंडर जारी करने के बावजूद काम न होने से जनता में नाराजगी बढ़ रही है और परियोजना का उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
हाड़ौती क्षेत्र के नागरिक इस योजना के जल्द क्रियान्वयन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि घर-घर स्वच्छ जल पहुँचाना समय की आवश्यकता है और इसमें किसी भी तरह की देरी जनता की भलाई के लिए हानिकारक हो सकती है।
इस प्रकार, जल जीवन मिशन की परवन वृह्द पेयजल योजना का अधूरा रहना और टेंडर प्रक्रिया में हो रही उदासीनता ने सरकारी योजनाओं की कार्यवाही और स्थानीय जनता की उम्मीदों के बीच बड़ा अंतर उजागर किया है। सभी की निगाह अब इस परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।
