तीजणियों की गवर आराधना से गूंजे घर-आंगन
गणगौर पर्व के अवसर पर शहर और गांवों में तीजणियों की गवर आराधना से घर-आंगन भक्तिमय माहौल से गूंज उठे। सुहागिन महिलाओं और युवतियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गवर माता की पूजा-अर्चना की। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार महिलाएं प्रतिदिन गवर माता का पूजन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना कर रही हैं।
गणगौर राजस्थान का प्रमुख लोक पर्व है, जिसे विशेष रूप से महिलाएं बड़े उत्साह के साथ मनाती हैं। इस पर्व में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए गवर माता से प्रार्थना करती हैं।
इन दिनों सुबह और शाम के समय महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर गवर माता की पूजा कर रही हैं। घरों में मिट्टी या लकड़ी की गवर और ईसर की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जा रही है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गणगौर गीत गाती हैं, जिससे पूरे घर और मोहल्ले का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
पूजन के दौरान महिलाएं सिर पर कलश या पूजा की थाली लेकर समूह में एकत्रित होती हैं और गीत गाते हुए गवर माता की आराधना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर भी गवर पूजन में शामिल हो रही हैं। इससे सामाजिक मेलजोल और उत्सव का माहौल बना हुआ है।
गणगौर के इस पखवाड़े में घरों में विशेष पकवान भी बनाए जा रहे हैं। महिलाएं परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर इस पर्व की खुशियां मना रही हैं। बच्चों और युवाओं में भी इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणगौर का पर्व सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से गवर माता की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
आने वाले दिनों में गणगौर पर्व के तहत विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। चैत्र शुक्ल तीज के दिन गणगौर का मुख्य पर्व मनाया जाएगा, जब गवर और ईसर की प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाएगी और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पर्व का समापन होगा।
