राजसमंद के बड़ा भाणुजा गांव में 800 साल पुरानी अनोखी होली की परंपरा, धुलंडी पर रंग नहीं
राजस्थान के राजसमंद जिले के बड़ा भाणुजा गांव में होली के दिन का नजारा देश के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग होता है। जहां आम तौर पर होली पर लोग रंग और गुलाल की बौछार करते हैं, वहीं बड़ा भाणुजा में यह परंपरा लगभग 800 वर्षों से जिंदा है और गांव के लोग धुलंडी के दिन रंग-गुलाल से पूरी तरह दूर रहते हैं।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, होली के दिन गांव के सभी पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सजते हैं। धोती-कुर्ता और साफा पहनकर वे दूल्हे के रूप में एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं। इस दौरान कोई भी रंग नहीं खेलता और न ही गुलाल का उपयोग किया जाता है। यह परंपरा लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर से जुड़ी हुई है और इसे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा स्थानीय धर्म और संस्कृति का हिस्सा है। होली के दिन दूल्हे के रूप में सजने वाले पुरुष मंदिर परिसर में इकट्ठा होकर धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। इस दौरान ढोलक और पारंपरिक संगीत के साथ झूमते हुए सांस्कृतिक गीत गाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह गांव की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने का प्रतीक भी है। पूरे गांव के लोग इस अनोखी परंपरा को सम्मान और श्रद्धा के साथ निभाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ा भाणुजा की यह होली परंपरा राजस्थान की लोक संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह न केवल स्थानीय लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है, बल्कि पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
धुलंडी के दिन, जब अन्य क्षेत्रों में लोग रंगों और गुलाल में डूबे होते हैं, बड़ा भाणुजा गांव में शांतिपूर्ण और धार्मिक उत्सव का माहौल रहता है। पुरुषों का यह दूल्हा रूप और मंदिर परिसर में इकट्ठा होना दर्शाता है कि इस गांव में परंपरा और धार्मिक आस्था को अत्यंत महत्व दिया जाता है।
स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समाज मिलकर इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए गांव में कार्यक्रमों का आयोजन और जागरूकता बढ़ाने के उपाय किए जाते हैं।
बड़ा भाणुजा की यह अनोखी होली परंपरा यह संदेश देती है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना आधुनिक जीवन में भी संभव है। यह गांव की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो राजस्थान के गौरव को और भी बढ़ाता है।
इस प्रकार, बड़ा भाणुजा गांव की होली सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक परंपरा का प्रतीक बन चुकी है। यहां का यह अनोखा उत्सव दर्शाता है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
