बारां में 128 साल पुरानी गणगौर शोभायात्रा का हो सकता है विराम, महंगाई और अनुदान की कमी बनी बाधा
राजस्थान के बारां जिले में 128 वर्षों से चली आ रही गणगौर शोभायात्रा इस बार एक दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ पर है। महंगाई और नगर परिषद से प्रस्तावित अनुदान की राशि नहीं मिलने के कारण गुरुवार को बारां शहर में यह ऐतिहासिक शोभायात्रा आयोजित नहीं की जाएगी। इस खबर ने स्थानीय महिलाओं और गणगौर उत्साही लोगों को मायूस कर दिया है।
बारां की महिलाएं और परिवार सालों से ईसर गणगौर की पूजा अर्चना करती आ रहे हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी महिलाएं गणगौर माता की शोभायात्रा के लिए बड़े उत्साह से तैयार थीं, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक कारणों के चलते यह परंपरा इस वर्ष टूटती दिख रही है।
स्थानीय नागरिकों और पूजा समितियों के अनुसार, महंगाई ने आयोजन के खर्च को बढ़ा दिया है। सजावट, झांकियों, बैंड-बाजों और अन्य आयोजनों के लिए आवश्यक धनराशि जुटाना इस बार मुश्किल हो गया। वहीं, नगर परिषद से मिलने वाला प्रस्तावित अनुदान भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। इन दो प्रमुख कारणों के चलते शोभायात्रा को स्थगित करने का फैसला लिया गया है।
महिलाओं और गणगौर उत्साही लोगों का कहना है कि यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। शोभायात्रा में शामिल होकर महिलाएं अपनी श्रद्धा और आस्था को व्यक्त करती हैं, और इसे देखकर शहरवासियों में भी उत्सव का माहौल बना रहता है। इस वर्ष शोभायात्रा न होने से समाज में दुःख और खिन्नता का माहौल है।
नगर परिषद के अधिकारियों ने कहा कि अनुदान की राशि और अन्य वित्तीय प्रबंधों को लेकर प्रशासन ने पूरी कोशिश की, लेकिन बजट और संसाधनों की सीमाओं के कारण इस बार शोभायात्रा संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में परंपरा को पुनर्जीवित करने और इसे सुचारू रूप से आयोजित कराने के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारां की गणगौर शोभायात्रा जैसी परंपराओं का टूटना केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक हानि नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समाज और सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी नुकसानदेह है। उन्होंने अपील की है कि प्रशासन और स्थानीय समाज मिलकर इस परंपरा को पुनः जीवित करने के लिए कदम उठाएं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि आर्थिक सहयोग और अनुदान उपलब्ध हो जाते हैं, तो अगली वर्ष इस परंपरा को पहले की तरह आयोजित किया जा सकता है। शहर के लोग और महिलाएं इस वर्ष की शोभायात्रा न होने की खेद जताते हुए भी भविष्य में इसे पुनर्जीवित करने की उम्मीद बनाए रख रहे हैं।
इस प्रकार, 128 साल पुरानी गणगौर शोभायात्रा के इस वर्ष न होने से बारां में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक माहौल पर असर पड़ा है। महंगाई और अनुदान की कमी ने परंपरा के महत्व और ऐतिहासिक महत्व को सामने रख दिया है, और अब शहरवासियों की नजरें प्रशासन और समुदाय के सहयोग पर टिकी हैं।
