हरमाड़ा में सिस्टम की सुस्ती उजागर: हाई मास्ट लाइट की मरम्मत के लिए 83 बार फाइल घूमी
राजधानी के जयपुर स्थित हरमाड़ा क्षेत्र में सरकारी सिस्टम की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक हाई मास्ट लाइट को ठीक कराने के लिए संबंधित फाइल 83 बार विभिन्न विभागों और दफ्तरों के बीच इधर-उधर घूमती रही, लेकिन लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाई मास्ट लाइट कई महीनों से खराब पड़ी थी, जिससे रात के समय पूरे इलाके में अंधेरा छाया रहता था। इससे राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी रही।
📁 83 बार फाइल मूवमेंट से खुली व्यवस्था की पोल
सूत्रों के मुताबिक, मरम्मत कार्य को लेकर फाइल अलग-अलग विभागों, शाखाओं और अधिकारियों के बीच कुल 83 बार मूव हुई। हर बार किसी न किसी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय अटकती रही। इस देरी ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
💡 अंधेरे में डूबा रहा इलाका
हाई मास्ट लाइट खराब होने के कारण पूरे क्षेत्र में रात के समय अंधेरा पसरा रहता था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रहती थी।
⚠️ नागरिकों में नाराजगी
इलाके के लोगों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि छोटी सी मरम्मत के लिए महीनों तक फाइलों का घूमना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाए और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
🏛️ सिस्टम पर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में समन्वय की कमी और फाइल सिस्टम की धीमी गति को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रक्रियाएं अभी भी जटिल और धीमी बनी हुई हैं।
📌 आगे की उम्मीद
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मामला सामने आने के बाद अब हाई मास्ट लाइट की मरम्मत जल्द की जाएगी और भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
