सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण में अहम फैसला सुनाया, ‘क्रीमी लेयर’ निर्धारण केवल माता-पिता की आय तक सीमित नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ‘क्रीमी लेयर’ का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने भारत संघ की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने दिल्ली, मद्रास और केरल उच्च न्यायालयों के उन निर्णयों को बरकरार रखा, जिनमें सिविल सेवा परीक्षाओं में ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) लाभ का दावा करने वाले उम्मीदवारों की पात्रता संबंधी प्रावधान बनाए गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला ओबीसी आरक्षण नीति को और अधिक व्यापक और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब केवल माता-पिता की आय को आधार मानकर किसी उम्मीदवार को आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकेगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अन्य मापदंडों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
इस फैसले से ओबीसी उम्मीदवारों की सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पात्रता सुनिश्चित होगी और समाज के पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा में मदद मिलेगी।
