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जोजरी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से पूछा- आखिर कब तक बहता रहेगा जहरीला पानी?

जोजरी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से पूछा- आखिर कब तक बहता रहेगा जहरीला पानी?
 
जोजरी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से पूछा- आखिर कब तक बहता रहेगा जहरीला पानी?

राजस्थान की जोजरी और लूणी नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से तीखे सवाल पूछते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर असंतोष व्यक्त किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि नदियों में लगातार प्रदूषित पानी छोड़े जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। कोर्ट ने पूछा कि आखिर इतने वर्षों के बाद भी जोजरी और लूणी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। बेंच ने यह भी जानना चाहा कि उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले दूषित जल को रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने राज्य सरकार, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे प्रदूषण की वर्तमान स्थिति, निगरानी व्यवस्था और उठाए गए सुधारात्मक कदमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की स्वच्छता केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि जोजरी और लूणी नदी के आसपास रहने वाले लोगों पर प्रदूषण का गंभीर असर पड़ रहा है। प्रदूषित पानी के कारण कृषि भूमि, भूजल और स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। कई क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीणों ने लंबे समय से जल प्रदूषण की समस्या को लेकर चिंता जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए नियमों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि पर्यावरणीय मामलों में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि प्रदूषण रोकने और नदियों के संरक्षण के लिए ठोस एवं परिणामकारी कदम उठाए जाएंगे।

गौरतलब है कि राजस्थान की जोजरी और लूणी नदी में औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित जल प्रवाह को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर न केवल नदी तंत्र बल्कि आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र और लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राजस्थान में नदी संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।