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उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का खुलासा, फुटेज में देखें एसओजी ने आरोपी को किया गिरफ्तार

उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का खुलासा, फुटेज में देखें एसओजी ने आरोपी को किया गिरफ्तार
 
उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का खुलासा, फुटेज में देखें एसओजी ने आरोपी को किया गिरफ्तार

उपनिरीक्षक पुलिस संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2021 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर चयन कराने के मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) को बड़ी सफलता मिली है। एसओजी ने इस हाई-प्रोफाइल भर्ती घोटाले में लंबे समय से वांछित चल रहे आरोपी सुनील कुमार विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है।

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रकरण सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। जांच में सामने आया कि चयनित अभ्यर्थी डालूराम मीणा पुत्र रामखिलाड़ी मीणा के स्थान पर हरसनराम देवासी पुत्र आईदानराम को डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा में बैठाया गया था। साजिश के तहत वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा दिलवाकर उसे उत्तीर्ण कराया गया और बाद में चयन सुनिश्चित किया गया।

एसओजी के अनुसार, आरोपी सुनील कुमार विश्नोई इस पूरे रैकेट में अहम भूमिका निभा रहा था। वह डमी कैंडिडेट की व्यवस्था करने, परीक्षा में बैठाने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश में शामिल था। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की तलाश में एसओजी की टीमें लगातार प्रयास कर रही थीं। तकनीकी साक्ष्यों और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। एसओजी अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी को शक है कि यह मामला केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाकर चयन कराने का नेटवर्क चला रहा था।

एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि मामले में पहले भी कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एसओजी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह की धांधली की है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।

इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपनिरीक्षक जैसी संवेदनशील भर्ती में इस तरह की धांधली से आम अभ्यर्थियों में रोष है। युवाओं का कहना है कि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के हक पर ऐसे फर्जीवाड़े पानी फेर देते हैं।

एसओजी ने भरोसा दिलाया है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भर्ती परीक्षाओं की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। फिलहाल, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।