गोविंददेवजी मंदिर में अचानक मची भगदड़: 45 मिनट तक पुलिस और बचाव दल ने संभाला मोर्चा, अनाउंसमेंट-सायरन सिस्टम ठप; फायर NOC भी नहीं
जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर में मंगलवार को अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बनने से अफरा-तफरी मच गई। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना के बाद करीब 45 मिनट तक पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल ने मोर्चा संभाले रखा। इस दौरान मंदिर की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर भी कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
घटना के दौरान मंदिर का अनाउंसमेंट और सायरन सिस्टम काम नहीं कर रहा था। ऐसे में श्रद्धालुओं तक जरूरी सूचना पहुंचाने में परेशानी हुई। आपात स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम अहम भूमिका निभाता है, लेकिन सिस्टम ठप होने से स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया।
मंदिर परिसर में लगा पंप हाउस भी बंद मिला। आग या किसी अन्य आपात स्थिति में पानी की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। ऐसे में पंप हाउस के बंद होने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि मंदिर के पास फायर NOC तक नहीं है।
भगदड़ जैसी स्थिति के बाद पुलिस और बचाव दल ने तुरंत मोर्चा संभाला। करीब 45 मिनट तक सुरक्षा कर्मियों, पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल की टीमों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने और भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए प्रयास किए गए।
गोविंददेवजी मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां भीड़ और बढ़ जाती है। ऐसे में आपातकालीन व्यवस्थाओं का मजबूत होना बेहद जरूरी है। लेकिन घटना के दौरान कई व्यवस्थाओं के ठप मिलने से मंदिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
अनाउंसमेंट और सायरन सिस्टम के काम नहीं करने से यदि बड़ी आपदा की स्थिति बनती तो श्रद्धालुओं को सुरक्षित दिशा में ले जाना मुश्किल हो सकता था। इसी तरह पंप हाउस बंद होने और फायर NOC नहीं होने की जानकारी भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
घटना के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं। अब यह जरूरी माना जा रहा है कि मंदिर परिसर की आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए और सुरक्षा से जुड़ी कमियों को जल्द दूर किया जाए।
फिलहाल घटना के दौरान किसी बड़े हादसे को टाल लिया गया, लेकिन इसने मंदिर में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने पर सभी आपातकालीन सिस्टम पूरी तरह सक्रिय और तैयार रहें।
