सीकर का मीठा प्याज देशभर में बना पहचान, धोद क्षेत्र में उगाई जा रही उच्च गुणवत्ता वाली फसल
राजस्थान के सीकर जिले में खेती के क्षेत्र में नवाचार और मेहनत से स्थानीय किसानों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। खासकर धोद क्षेत्र में उगाए जाने वाले मीठे प्याज की मिठास और गुणवत्ता ने इसे केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश की प्रमुख मंडियों में भी प्रसिद्ध कर दिया है।
धोद क्षेत्र का विशेष योगदान
धोद क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु प्याज की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। स्थानीय किसान पारंपरिक तकनीकों के साथ आधुनिक कृषि विधियों का मिश्रण कर उन्नत किस्म के प्याज का उत्पादन कर रहे हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र का प्याज स्वाद में मीठा और आकार में एक समान होता है।
नवाचार और तकनीक का महत्व
सीकर के किसानों ने खेती में कई नवाचार अपनाए हैं। जल प्रबंधन, सिंचाई की आधुनिक तकनीक और उचित उर्वरक प्रबंधन से उत्पादन में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, खेतों में कीट नियंत्रण और फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए नई तकनीकें लागू की गई हैं।
किसानों का कहना है कि इन नवाचारों की मदद से प्याज की गुणवत्ता और मिठास बनी रहती है, जिससे इसे उच्च कीमतों पर राष्ट्रीय मंडियों में बेचा जा सकता है।
राष्ट्रीय पहचान
धोद क्षेत्र का मीठा प्याज अब देशभर में अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। राजस्थान की मंडियों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसी बड़ी मंडियों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की पहचान से स्थानीय किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है।
किसान और बाजार का तालमेल
स्थानीय किसान अब सीधे व्यापारियों और वितरकों के साथ संपर्क कर प्याज की बिक्री करते हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि फसल का मूल्य भी सही तरीके से मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में यदि गुणवत्ता बनाए रखी जाए और ब्रांडिंग पर जोर दिया जाए, तो सीकर के मीठे प्याज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकती है।
