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बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, 363 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया

बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, 363 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया
 
बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, 363 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया

राजस्थान के बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी की रक्षा के लिए चल रहे ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन ने मंगलवार को निर्णायक मोड़ ले लिया। सुबह-सुबह गुरु जंभेश्वर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद 363 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया। इसमें 29 साधु-संत, 29 महिलाएं और 305 पुरुष शामिल हैं।

आंदोलन में संत-महात्माओं की बड़ी भागीदारी के साथ महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति भी देखी गई। आंदोलनकारियों ने खेजड़ी वृक्षों की कटाई रोकने और राज्य सरकार से ठोस संरक्षण नीति लागू करने की मांग दोहराई।

इस आंदोलन को उस समय विशेष राजनीतिक समर्थन मिला जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने सार्वजनिक रूप से इसका समर्थन किया। उनके समर्थन से आंदोलन की व्यापकता और जनसमर्थन में वृद्धि हुई है।

संतों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक खेजड़ी की कटाई पर रोक नहीं लगती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन की आधारशिला है।

स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। आंदोलन के इस निर्णायक चरण ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और राज्यभर में खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता दी है।