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पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर रूसी साध्वी कर रहीं ‘खड़ेश्वरी तप’, वीडियो में देंखे 24 घंटे बिना बैठे और बिना सोए साधना जारी

पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर रूसी साध्वी कर रहीं ‘खड़ेश्वरी तप’, वीडियो में देंखे 24 घंटे बिना बैठे और बिना सोए साधना जारी
 
पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर रूसी साध्वी कर रहीं ‘खड़ेश्वरी तप’, वीडियो में देंखे 24 घंटे बिना बैठे और बिना सोए साधना जारी

राजस्थान के पवित्र तीर्थ स्थल Pushkar Lake के जयपुर घाट पर इन दिनों एक अनोखी और कठिन तपस्या चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां रूसी मूल की साध्वी और नाथ संप्रदाय से जुड़ी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ‘खड़ेश्वरी तप’ कर रही हैं, जिसमें साधक को बिना बैठे और बिना सोए लगातार 24 घंटे साधना करनी होती है। यह कठिन साधना चैत्र नवरात्रि के अवसर पर 19 मार्च से शुरू हुई थी और 28 मार्च तक जारी रहने की बात कही गई है। इस तपस्या के दौरान साध्वी अपना अधिकांश समय मंत्र जाप, ध्यान और पूजा-अर्चना में व्यतीत कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, साधना के दौरान शरीर को सहारा देने के लिए वह केवल एक झूले का उपयोग करती हैं, जबकि विश्राम के लिए परंपरागत रूप से बैठने या सोने की अनुमति नहीं होती। इस दौरान वे दिन में केवल एक बार फलाहार ग्रहण करती हैं। लगातार कठिन तप के चलते उनके पैरों में सूजन तक आ जाने की बात सामने आई है।

साध्वी अन्नपूर्णा नाथ के अनुसार, वह वर्तमान में टूरिस्ट वीजा पर भारत में निवास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वह किसी अन्य देश या अपने देश लौट जाती हैं और फिर दोबारा टूरिस्ट वीजा पर भारत वापस आ जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली बार वह अगस्त 2025 में नेपाल में Pashupatinath Temple के दर्शन के बाद भारत लौटी थीं। स्थानीय स्तर पर इस तपस्या को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता और आस्था का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग जयपुर घाट पर पहुंचकर साध्वी के दर्शन कर रहे हैं और इसे आध्यात्मिक साधना का दुर्लभ उदाहरण मान रहे हैं।

वहीं, नाथ संप्रदाय से जुड़े जानकारों का कहना है कि ‘खड़ेश्वरी तप’ अत्यंत कठिन साधना मानी जाती है, जिसमें शरीर पर पूर्ण नियंत्रण और निरंतर ध्यान आवश्यक होता है। यह तपस्या व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता की गंभीर परीक्षा के रूप में देखी जाती है। फिलहाल, यह अनोखी साधना पुष्कर में धार्मिक और आध्यात्मिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस तपस्या को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।