जिले की सीमाओं में बदलाव पर बवाल, वीडियो में देखें धोरीमन्ना में धरने पर बैठे पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी
राजस्थान सरकार द्वारा जिलों के पुनर्गठन को लेकर जारी किए गए नोटिफिकेशन के बाद पश्चिमी राजस्थान में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। बाड़मेर जिले से गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को अलग कर नए जिले बालोतरा में शामिल किए जाने के फैसले के विरोध में धोरीमन्ना मुख्यालय पर लगातार धरना जारी है। इस आंदोलन की अगुवाई 75 वर्षीय पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी कर रहे हैं, जो कड़कड़ाती ठंड के बावजूद धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
रविवार की रात पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने धरना स्थल पर ही गुजारी। ठंड से बचाव के लिए कंबल ओढ़कर खुले आसमान के नीचे उन्होंने रात बिताई। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक भी धरना स्थल पर मौजूद रहे। धरने में शामिल लोगों का कहना है कि प्रशासनिक फैसले से स्थानीय जनता की भावनाओं को ठेस पहुंची है और बिना जनसहमति के जिले की सीमाएं बदली गई हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर की तारीख का जिला पुनर्गठन संबंधी नोटिफिकेशन 2 जनवरी की रात को सार्वजनिक किया। इस नोटिफिकेशन में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव किया गया। इसके तहत बाड़मेर जिले से धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को अलग कर नवगठित बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बायतु क्षेत्र को पुनः बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है।
पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी का कहना है कि धोरीमन्ना और गुड़ामालानी का प्रशासनिक, भौगोलिक और सामाजिक जुड़ाव बाड़मेर से रहा है। ऐसे में इन्हें बालोतरा जिले में शामिल करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि जनता के हितों के भी खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
इस नोटिफिकेशन के सामने आने के बाद से जिले में विरोध और समर्थन—दोनों स्वर सुनाई दे रहे हैं। एक ओर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस फैसले का विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं में इसको लेकर उत्साह देखा जा रहा है। धोरीमन्ना क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं ने वाहन रैली निकाली और पटाखे फोड़कर जश्न मनाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की सीमाओं में बदलाव से प्रशासनिक सेवाओं, आवागमन और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा। कई ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि नए जिले में शामिल होने से उन्हें जिला मुख्यालय तक पहुंचने में अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी।
फिलहाल धोरीमन्ना में धरना जारी है और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले में कोई बदलाव करती है या नहीं।
