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रीट पेपर लीक मामले में जब्त 1.20 करोड़ की नकदी की अब होगी FD, वीडियो में जानें कोर्ट ने और क्या दिए सख्त आदेश?

रीट पेपर लीक मामले में जब्त 1.20 करोड़ की नकदी की अब होगी FD, वीडियो में जानें कोर्ट ने और क्या दिए सख्त आदेश?
 
रीट पेपर लीक मामले में जब्त 1.20 करोड़ की नकदी की अब होगी FD, वीडियो में जानें कोर्ट ने और क्या दिए सख्त आदेश?

राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET) 2021 के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में जब्त की गई 1 करोड़ 20 लाख रुपए से अधिक की नकदी अब फिक्स डिपॉजिट (FD) में बदली जाएगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामलों की विशेष अदालत ने इस संबंध में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यह FD उस बैंक में करवाई जाए, जो सर्वोच्च ब्याज दर प्रदान करता हो।

यह नकद राशि बीते चार वर्षों से सवाई माधोपुर जिले के गंगापुरसिटी थाने में रखी हुई थी। उस दौरान मामला वहीं लंबित था, लेकिन हाल ही में रीट पेपर लीक से जुड़ी जांच जयपुर स्थानांतरित होने के बाद जब्त नकदी और अन्य जब्ती सामग्री ईडी कोर्ट को सौंप दी गई। अब कोर्ट ने थानाधिकारी की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश पारित किया।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि सरकारी धन की सुरक्षा और मूल्य में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए इस नकदी को एफडी में रखा जाए। साथ ही, एफडी कराते समय बैंक के चयन में यह ध्यान रखा जाए कि ब्याज दर सबसे अधिक हो, जिससे सरकारी खजाने को अधिक लाभ मिल सके।

मामला क्या है?

रीट 2021 परीक्षा के पेपर लीक का मामला राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर एक बड़े सवाल के रूप में उभरा था। इस घोटाले में कई अधिकारियों, दलालों और शिक्षा माफियाओं की संलिप्तता सामने आई थी। एसओजी और बाद में ईडी ने इस मामले की गहन जांच की और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई का खुलासा किया।

जांच के दौरान गंगापुरसिटी थाना पुलिस ने 1 करोड़ 20 लाख से अधिक की नकदी जब्त की थी, जिसे अब तक सबूत के तौर पर थाने में रखा गया था। लेकिन अब केस की कानूनी प्रक्रिया जयपुर में आगे बढ़ रही है, लिहाजा सबूतों और जब्ती रकम को भी जयपुर भेज दिया गया।

क्यों अहम है कोर्ट का फैसला?

इस फैसले से एक ओर जहां जब्त सरकारी राशि को निष्क्रिय रखने के बजाय सक्रिय वित्तीय संपत्ति में बदला जा सकेगा, वहीं इससे मिलने वाला ब्याज भी सार्वजनिक हित में काम आ सकेगा। यह कदम न केवल न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि जब्त धनराशि का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।