RGHS भुगतान संकट गहराया: अस्पतालों ने रोका मुफ्त इलाज, मरीजों पर बढ़ा बोझ
राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य योजना Rajasthan Government Health Scheme (RGHS) को लेकर बड़ा संकट गहराता जा रहा है। योजना के तहत भुगतान में देरी और बकाया राशि का निस्तारण नहीं होने के कारण कई निजी अस्पतालों ने कैशलेस इलाज (मुफ्त इलाज सुविधा) को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।
सूत्रों के अनुसार, राज्यभर के कई प्रमुख अस्पतालों ने RGHS के अंतर्गत इलाज करने से फिलहाल हाथ खींच लिए हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटका हुआ है, जिसके कारण दवाइयों, स्टाफ वेतन और अस्पताल संचालन में गंभीर वित्तीय संकट पैदा हो गया है।
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि RGHS जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जो आम जनता को राहत देने के लिए शुरू की गई थी, अब लापरवाही और अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही है। गहलोत ने आरोप लगाया कि भुगतान संकट के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
अस्पतालों के कैशलेस सेवा बंद करने से मरीजों को अब इलाज के लिए पहले भुगतान करना पड़ रहा है या फिर निजी खर्च से इलाज करवाना पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि अचानक आई इस स्थिति ने उन्हें आर्थिक रूप से संकट में डाल दिया है, खासकर गंभीर बीमारियों के इलाज में।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भुगतान संकट जल्द दूर नहीं किया गया तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ने के बावजूद सुविधाएं सीमित होती जा रही हैं, जिससे इलाज की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसी बीच गहलोत ने अपने बयान में जलवायु परिवर्तन (climate change) और प्रशासनिक अव्यवस्था का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को केवल योजनाओं की घोषणा नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात और बढ़ती बीमारियों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना समय की मांग है।
अस्पताल संगठनों ने भी सरकार से जल्द बकाया भुगतान जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कई अन्य अस्पताल भी कैशलेस सेवाएं बंद करने को मजबूर होंगे, जिससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
सरकारी स्तर पर हालांकि अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है और जल्द समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे विवाद ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं और सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
