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457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी शुरू, 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित; जानें किस वर्ग को कितने पद

 
457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी शुरू, 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित; जानें किस वर्ग को कितने पद

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर आरक्षण की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश की पंचायत समितियों के 457 प्रधान पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जा रही है। इस प्रक्रिया के बाद यह तय होगा कि कौन-कौन सी पंचायत समितियों में प्रधान का पद सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा।

आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रधान पदों में 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। यानी अलग-अलग श्रेणियों में निर्धारित सीटों में से आधी सीटों पर महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लागू होगा। लॉटरी के बाद प्रत्येक पंचायत समिति के प्रधान पद की श्रेणी स्पष्ट हो जाएगी।

लॉटरी प्रक्रिया के दौरान आरक्षण रोस्टर और निर्धारित नियमों को आधार बनाया जा रहा है। पहले से तय आरक्षण व्यवस्था के अनुसार एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए पद आरक्षित किए जाएंगे। इसके अलावा सामान्य वर्ग के लिए भी प्रधान पद निर्धारित होंगे। महिला आरक्षण अलग-अलग श्रेणियों में लागू किया जाएगा।

प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की नजरें टिकी हुई हैं। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदार अब अपनी पंचायत समिति में आरक्षण की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। सीट आरक्षित होने के बाद कई उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति बदल सकती है, जबकि आरक्षित वर्ग के नए दावेदारों को चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिलेगा।

आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के बाद पंचायत समितियों के प्रधान पदों की तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके साथ ही जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के आरक्षण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय किया जाएगा।

महिला आरक्षण के कारण इस बार बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है। जिन पंचायत समितियों में प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा, वहां राजनीतिक दलों और स्थानीय स्तर पर संभावित प्रत्याशियों की गतिविधियां तेज होंगी।

457 प्रधान पदों की लॉटरी के परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदलेंगे। आरक्षण की श्रेणी स्पष्ट होते ही संभावित उम्मीदवार जनसंपर्क और चुनावी तैयारियों को गति दे सकेंगे। पंचायत समितियों में किस वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलेगा, इसकी तस्वीर लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगी।