राशन डीलर पर गेहूं नहीं देने और अवैध वसूली के आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग
राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन को लेकर ग्रामीणों ने राशन डीलर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार राशन की दुकान के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें गेहूं नहीं दिया जा रहा। वहीं, कुछ लोगों ने राशन वितरण के नाम पर अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से करते हुए राशन डीलर की जांच कराने और पात्र लोगों को निर्धारित मात्रा में गेहूं उपलब्ध कराने की मांग की है।
बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं मिला राशन
ग्रामीणों का आरोप है कि वे राशन लेने के लिए कई बार डीलर की दुकान पर पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें हर बार किसी न किसी कारण से वापस लौटा दिया जाता है। उनका कहना है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित गेहूं नहीं मिल पा रहा है।गों का कहना है कि राशन दुकान पर लंबी दूरी तय करके पहुंचने के बाद भी राशन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकारी राशन ही खाद्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।
अवैध वसूली का भी लगाया आरोप
शिकायतकर्ताओं ने राशन डीलर पर गेहूं वितरण के बदले निर्धारित राशि से अधिक पैसे लेने का आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन लेने के लिए उनसे अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राशन वितरण का रिकॉर्ड और लाभार्थियों के ई-केवाईसी समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
कलेक्टर से जांच की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि राशन वितरण में किसी तरह की अनियमितता हो रही है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि पात्र परिवारों को उनका पूरा राशन समय पर उपलब्ध कराया जाए और भविष्य में उन्हें राशन लेने के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
शिकायत के बाद अब प्रशासन की जांच पर सभी की नजर है। संबंधित अधिकारियों की ओर से राशन डीलर के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वितरण व्यवस्था की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही लाभार्थियों से भी जानकारी ली जा सकती है।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो राशन डीलर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की गंभीरता से जांच कर उन्हें राहत दिलाएगा।
