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RAS अधिकारी पंकज ओझा को फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट के आरोप में चार्जशीट, वीडियो में जाने 15 दिन में मांगा जवाब; आरोपों को बताया गलत

RAS अधिकारी पंकज ओझा को फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट के आरोप में चार्जशीट, वीडियो में जाने 15 दिन में मांगा जवाब; आरोपों को बताया गलत
 
RAS अधिकारी पंकज ओझा को फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट के आरोप में चार्जशीट, वीडियो में जाने 15 दिन में मांगा जवाब; आरोपों को बताया गलत

राजस्थान सरकार ने चर्चित वरिष्ठ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी पंकज ओझा को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ जातीय और सांप्रदायिक पोस्ट करने के मामले में चार्जशीट जारी की है। कार्मिक विभाग ने करीब एक साल पुराने मामले में आरोपों को गंभीर मानते हुए ओझा से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

पंकज ओझा वर्तमान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे गोपालन निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। कार्मिक विभाग की ओर से जारी चार्जशीट में उनके फेसबुक अकाउंट से की गई पोस्ट और शेयर की गई सामग्री को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

अक्टूबर 2025 की पोस्ट को लेकर कार्रवाई

चार्जशीट में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, गोपालन निदेशक के पद पर रहते हुए पंकज ओझा ने अपनी फेसबुक आईडी ‘RAS Pankaj Ojha’ से अक्टूबर 2025 में कई ऐसी पोस्ट की थीं, जिन्हें विभाग ने सार्वजनिक रूप से भड़काऊ और आपत्तिजनक माना है।आरोपों के अनुसार, ओझा ने 16 अक्टूबर, 19 अक्टूबर, 21 अक्टूबर, 22 से 25 अक्टूबर और 27 अक्टूबर 2025 को राजनीतिक, सांप्रदायिक और जातिगत विषयों से जुड़ी पोस्ट कीं और कुछ पोस्ट को शेयर भी किया। विभाग का मानना है कि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के रूप में सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री साझा करना सेवा आचरण के नियमों के अनुरूप नहीं है।

राजनीतिक और प्रशासनिक सिफारिश पर भी पाबंदी

कार्मिक विभाग ने चार्जशीट जारी करने के साथ पंकज ओझा को यह भी निर्देश दिया है कि वे इस मामले में किसी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक सिफारिश नहीं करवाएं। विभाग ने उन्हें तय समय में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। 15 दिन के भीतर जवाब मिलने के बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।

ओझा ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, पंकज ओझा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। अब इस मामले में उनका लिखित जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग उनके जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और सेवा आचरण को लेकर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खासतौर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सार्वजनिक पोस्ट को लेकर सरकारी नियमों और जिम्मेदारियों पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।