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जयपुर में रामकथा और हनुमत महायज्ञ की धूम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से होगा आयोजन भव्य

जयपुर में रामकथा और हनुमत महायज्ञ की धूम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से होगा आयोजन भव्य
 
जयपुर में रामकथा और हनुमत महायज्ञ की धूम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से होगा आयोजन भव्य

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर इन दिनों पूरी तरह से राममय हो चुकी है। शहर के नींदड़ इलाके में चल रही जगदगुरु रामभद्राचार्य की दिव्य रामकथा और 1008 श्री हनुमत महायज्ञ का आयोजन लोगों के लिए एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बन गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी शहर में उत्साह का माहौल पैदा कर रहा है।

विशेष जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त, साधु-संत और धर्मप्रेमी शामिल हो रहे हैं। रामकथा के दौरान रामचरित मानस और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पठन और प्रवचन किया जा रहा है, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन की नई प्रेरणा मिल रही है। वहीं, 1008 श्री हनुमत महायज्ञ में मंत्रोच्चारण, हवन और भजन-कीर्तन के माध्यम से वातावरण में धार्मिक और शांति का संचार किया जा रहा है।

इस बार इस आयोजन की महत्ता और भी बढ़ गई है, क्योंकि 16 जनवरी को देश की प्रथम नागरिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जयपुर पहुंच सकती हैं। राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन और भी भव्य और ऐतिहासिक बन जाएगा। आध्यात्मिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के शामिल होने की खबर से भक्तों और नागरिकों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। आयोजन समिति ने बताया कि राष्ट्रपति के आगमन से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा के हर इंतजाम किए जा रहे हैं।

रामकथा में उपस्थित लोगों का कहना है कि जगदगुरु रामभद्राचार्य के प्रवचन अत्यंत मार्मिक और जीवन प्रेरक हैं। उनका स्पष्ट और सरल शैली में धार्मिक ज्ञान साझा करना भक्तों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। वहीं, हनुमत महायज्ञ में किए जा रहे यज्ञ और मंत्रोच्चारण से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है, जिससे शहरवासियों को भी आध्यात्मिक आनंद मिल रहा है।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने भी इस आयोजन को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। यातायात नियंत्रण, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष टोल और गश्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, आयोजन स्थल पर चिकित्सा और राहत केंद्र भी बनाए गए हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि समाज में मानवता, श्रद्धा और आध्यात्मिकता को जोड़ने का माध्यम भी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन से न केवल जयपुर की सांस्कृतिक धरोहर की झलक मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस आयोजन की महत्ता उजागर होगी।

इस प्रकार, जयपुर की नींदड़ नगरी इन दिनों धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल में पूरी तरह सराबोर है। रामकथा और हनुमत महायज्ञ ने शहरवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं के जीवन में एक नई चेतना और ऊर्जा भर दी है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना देगी, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।