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लंदन का बिजनेसमैन का बना रामदेवरा सेवादार, पैदल यात्रियों के पैर दबाते हैं, भंडारा लगाते हैं, फुटेज में देखें एक बाबा से मिलने के बाद कैसे हुआ चमत्कार

लंदन का बिजनेसमैन का बना रामदेवरा सेवादार, पैदल यात्रियों के पैर दबाते हैं, भंडारा लगाते हैं, फुटेज में देखें एक बाबा से मिलने के बाद कैसे हुआ चमत्कार
 
लंदन का बिजनेसमैन का बना रामदेवरा सेवादार, पैदल यात्रियों के पैर दबाते हैं, भंडारा लगाते हैं, फुटेज में देखें एक बाबा से मिलने के बाद कैसे हुआ चमत्कार

कहते हैं कि सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के की जाए। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहे हैं लंदन के एक बिजनेसमैन, जो हर साल बीकानेर को अपना ठिकाना बनाते हैं। खास बात यह है कि वह यहां आने के बाद पांच दिन तक भंडारा लगाते हैं और पैदल यात्रियों की सेवा में जुट जाते हैं। इस परंपरा की शुरुआत करीब 39 साल पहले हुई थी। शुरुआत में उन्होंने महज 700 रुपए से भंडारे का आयोजन किया था। धीरे-धीरे इसमें उनके सहयोगी और दोस्त भी शामिल होते गए और आज यह सेवा हजारों लोगों तक पहुंच रही है।

पैदल यात्रियों की सेवा सबसे बड़ी पूजा

भंडारे में भोजन परोसने से लेकर थके-हारे यात्रियों के पैरों को दबाने और उनके घावों पर मरहम लगाने तक का काम वे खुद करते हैं। किसी भी तरह का भेदभाव किए बिना वह हर आने वाले को सेवा प्रदान करते हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि उनके इस निस्वार्थ भाव ने उन्हें ‘सेवा का सच्चा साधक’ बना दिया है।

सहयोगियों का मिलता है साथ

लंदन में बड़े कारोबारी होने के बावजूद वे हर साल अपनी व्यस्तताओं से समय निकालकर बीकानेर पहुंचते हैं। यहां उनके दोस्त और सहयोगी भी इस सेवा कार्य में शामिल होते हैं। सभी मिलकर पांच दिन तक भंडारे का संचालन करते हैं। खासकर धार्मिक यात्राओं पर निकले पैदल यात्री इस भंडारे से लाभान्वित होते हैं।

39 साल से जारी है परंपरा

यह सिलसिला पिछले तीन दशकों से अधिक समय से लगातार जारी है। स्थानीय प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं भी इस सेवा कार्य में सहयोग देती हैं। गर्मी या ठंड, किसी भी मौसम में यह परंपरा कभी टूटी नहीं। यही वजह है कि आज यह भंडारा बीकानेर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

समाज में संदेश

उनकी यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि सेवा भाव से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। कारोबार में सफलता हासिल करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहकर निस्वार्थ भाव से सेवा करता है तो वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है।