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राजस्थान की भर्ती राजनीति गरमाई, राजेंद्र राठौड़ का गहलोत पर हमला—“पहले था लूट का दौर, अब पारदर्शिता”

राजस्थान की भर्ती राजनीति गरमाई, राजेंद्र राठौड़ का गहलोत पर हमला—“पहले था लूट का दौर, अब पारदर्शिता”
 
राजस्थान की भर्ती राजनीति गरमाई, राजेंद्र राठौड़ का गहलोत पर हमला—“पहले था लूट का दौर, अब पारदर्शिता”

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता को लेकर सियासी बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग का रूप ले लिया है।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और “लूट” का माहौल था, जिससे प्रदेश की युवाओं की उम्मीदों को नुकसान पहुंचा।

राठौड़ ने दावा किया कि वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में सरकारी भर्तियां पारदर्शी तरीके से हो रही हैं और युवाओं को बिना किसी सिफारिश या प्रभाव के अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अब प्रदेश में “ना खर्ची चल रही है और ना ही पर्ची”, यानी भर्ती प्रक्रियाओं में किसी तरह की सिफारिश या अनियमितता की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों से जुड़ा मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील रहा है। ऐसे में इस पर बयानबाजी सीधे तौर पर युवाओं के बीच राजनीतिक संदेश देने का प्रयास माना जा रहा है।

वहीं, कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी खेमे में इसे लेकर असहमति की चर्चा जरूर तेज है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछली सरकार में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए गए थे।

इस पूरे विवाद के बीच राज्य में भर्ती परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया पर एक बार फिर राजनीतिक बहस गर्म हो गई है, जो आने वाले समय में और अधिक तेज हो सकती है।

कुल मिलाकर, राजस्थान की राजनीति में भर्ती और पारदर्शिता का मुद्दा एक बार फिर सियासी टकराव का बड़ा कारण बन गया है, जहां दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।