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सेना दिवस परेड में दिखेगी राजस्थान की सांस्कृतिक शान, फुटेज में देखें कला और लोक परंपराओं की झांकी बनेगी आकर्षण का केंद्र

सेना दिवस परेड में दिखेगी राजस्थान की सांस्कृतिक शान, फुटेज में देखें कला और लोक परंपराओं की झांकी बनेगी आकर्षण का केंद्र
 
सेना दिवस परेड में दिखेगी राजस्थान की सांस्कृतिक शान, फुटेज में देखें कला और लोक परंपराओं की झांकी बनेगी आकर्षण का केंद्र

सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित होने वाली भव्य परेड इस बार केवल सेना के शौर्य और पराक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की मनोहर झांकी भी देशभर का ध्यान आकर्षित करेगी। जगतपुरा स्थित महल रोड पर चल रही सेना दिवस परेड की रिहर्सल के दौरान यह झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। झांकी के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

इस सांस्कृतिक झांकी को राजस्थान सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की ओर से तैयार किया गया है। झांकी की नोडल एजेंसी राजस्थान ललित कला अकादमी है, जिसके वरिष्ठ और अनुभवी कलाकारों की देखरेख में इसे साकार रूप दिया गया है। कलाकारों ने कड़ी मेहनत और रचनात्मकता के साथ राजस्थान की पहचान को दर्शाने वाले विभिन्न तत्वों को झांकी में उकेरा है।

झांकी की थीम “राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर—कला, शिल्प और लोक उत्सव” रखी गई है। इसका उद्देश्य राज्य की सदियों पुरानी परंपराओं, भव्य वास्तुकला, अनूठे हस्तशिल्प और जीवंत लोक कलाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत करना है। झांकी में राजस्थान की विविधता को दर्शाते हुए रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक आभूषण, लोक नृत्य और शिल्पकला के प्रतीक शामिल किए गए हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में सामने लाते हैं।

रिहर्सल के दौरान झांकी में राजस्थानी स्थापत्य कला की झलक देखने को मिल रही है, जिसमें किलों, हवेलियों और पारंपरिक अलंकरण की झांकी बनाई गई है। इसके साथ ही पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे ब्लू पॉटरी, मिनिएचर पेंटिंग, कढ़ाई, बंधेज और लकड़ी की नक्काशी को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। लोक उत्सवों की जीवंतता को दिखाने के लिए झांकी में घूमर, कालबेलिया जैसे लोक नृत्यों की झलक भी शामिल की गई है।

कलाकारों का कहना है कि इस झांकी के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। सेना दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजन में इस तरह की झांकी शामिल होना राज्य के लिए गर्व की बात है। यह न केवल राजस्थान की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करेगा।

महल रोड पर चल रही रिहर्सल के दौरान सेना के अनुशासन और सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के बीच जब यह सांस्कृतिक झांकी गुजरती है, तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है। सेना के शौर्य और राजस्थान की लोक परंपराओं का यह संगम दर्शकों को खासा प्रभावित कर रहा है। रिहर्सल देखने पहुंचे लोग झांकी की भव्यता और रंगीन प्रस्तुति की जमकर सराहना कर रहे हैं।

सेना दिवस पर आयोजित होने वाली परेड में जब यह झांकी पूरी शान के साथ निकलेगी, तब निश्चित रूप से यह राजस्थान की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं का गौरवपूर्ण संदेश देशभर तक पहुंचाएगी। यह आयोजन न केवल सैन्य बलों के सम्मान का प्रतीक होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का भी उत्सव बनकर सामने आएगा।