राजस्थान में निकाय चुनाव पर सरकार और आयोग आमने-सामने, फुटेज में देखें मंत्री बोले- "जो भी करना पडे दिसंबर में चुनाव करवाएंगे"
राजस्थान में शहरी निकायों के चुनावों को लेकर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच अब खुला टकराव सामने आता दिख रहा है। एक ओर राज्य निर्वाचन आयुक्त ने हाल ही में घोषणा की थी कि दो महीने के भीतर शहरी निकायों के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए साफ कर दिया है कि चुनाव दिसंबर माह में ही कराए जाएंगे।
यूडीएच (शहरी विकास एवं आवास) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बुधवार को बयान देते हुए कहा कि राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है – हम सभी 309 शहरी निकायों के चुनाव एक साथ दिसंबर में करवाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टिकोण से पारदर्शिता और सुगमता बनी रहेगी। मंत्री के इस बयान ने सीधे तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग की घोषणा को चुनौती दी है, जिससे दोनों संस्थाओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई है।
दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने तर्क दिया था कि वर्तमान बोर्डों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और लोकतांत्रिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए चुनावों में देर नहीं की जा सकती। आयोग ने दो महीने के भीतर चुनाव कराने की रूपरेखा भी सार्वजनिक कर दी थी। आयोग का मानना है कि समय पर चुनाव न होने से लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता और जनता के भरोसे पर असर पड़ेगा।
वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि दिसंबर में सभी निकायों के चुनाव एक साथ करवाने से प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा। सरकार का यह भी तर्क है कि अगर अलग-अलग समय पर चुनाव हुए तो इससे राजनीतिक अस्थिरता और अनावश्यक खर्च बढ़ेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने का अधिकार है, लेकिन व्यावहारिक दृष्टिकोण से सरकार की भूमिका भी अहम रहती है। ऐसे में टकराव का समाधान आपसी संवाद और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही संभव हो पाएगा।
इधर विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। वहीं सत्तापक्ष का दावा है कि दिसंबर में एक साथ चुनाव कराना जनहित और सुशासन की दृष्टि से बेहतर विकल्प है।
