राजस्थान तबादला विवाद: RSS कार्यकर्ता शिक्षक की पोस्ट से सियासी हलचल, वीडियो में जाने मंत्री के बेटे का ट्रांसफर रद्द होने पर भी उठे सवाल
राजस्थान में तबादलों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। धौलपुर के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर और खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यकर्ता बताने वाले ओमवीर पेलावत की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमावत का तबादला 24 घंटे के भीतर निरस्त किए जाने को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
RSS कार्यकर्ता शिक्षक ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
धौलपुर जिले के एक सरकारी विद्यालय में कार्यरत हेडमास्टर ओमवीर पेलावत ने अपने तबादले को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि वह RSS के कार्यकर्ता रहे हैं और भाजपा के जिला प्रमुख तथा प्रधान बनाने में कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।उन्होंने पोस्ट में दावा किया कि 59 वर्ष की उम्र में उनका तबादला धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया है। अपनी पोस्ट में उन्होंने शिक्षा मंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि, "माननीय शिक्षा मंत्री जी, आपकी जिद भाजपा को ले डूबेगी।" उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
मंत्री के बेटे के तबादले पर भी विवाद
इधर, राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमावत के तबादले को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।जानकारी के अनुसार, 9 जुलाई को दीपक कुमावत, जो पाली जिले की पंचायत समिति सुमेरपुर में सहायक प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत हैं, उनका तबादला पंचायत समिति जालोर कर दिया गया था। हालांकि, अगले ही दिन 10 जुलाई को यह आदेश निरस्त कर उन्हें उनके मूल पद पर ही बनाए रखने का आदेश जारी कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
दीपक कुमावत के तबादले का आदेश महज 24 घंटे में रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे प्रभाव का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सरकार की तबादला नीति पर सवाल उठा रहे हैं।वहीं, ओमवीर पेलावत की पोस्ट को भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है और इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
फिलहाल, ओमवीर पेलावत के आरोपों और दीपक कुमावत के तबादले को लेकर उठे विवाद पर राज्य सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।राजस्थान में तबादलों को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। ऐसे में इन दोनों मामलों ने एक बार फिर तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक स्थिति पर सभी की नजर रहेगी।
