राजस्थान तीन बच्चों वाले भी बन सकेंगे सरपंच और प्रधान, वीडियो में जानें पंचायत और नगर निकाय चुनाव में अनपढ़ों पर रोक नहीं
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों में अनपढ़ों के चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। सरकार ने यह जानकारी कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा के सवाल के जवाब में लिखित रूप से दी। गोदारा ने विधानसभा में सवाल उठाया था कि क्या सरकार नगर निकायों के चुनाव में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और संतान संबंधी प्रावधानों में संशोधन करने का विचार रखती है। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने के लिए किसी भी तरह की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं होगी।
साथ ही, सरकार ने यह भी जानकारी दी कि दो से ज्यादा संतान वाले उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने की रोक हटाने के लिए संबंधित बिल विधि विभाग में प्रक्रियाधीन है। यह पहल राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय उन लोगों के लिए राहत देने वाला है, जो शिक्षा के मामले में पिछड़े होने के बावजूद स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं। सरकार की ओर से लिखित जवाब देना पहली बार इस तरह के मुद्दे पर सार्वजनिक स्पष्टता प्रदान करता है।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में नगर निकाय और पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता और परिवार नियोजन संबंधी प्रावधानों को लेकर कई विवाद उठे थे। समाज में यह बहस चल रही थी कि क्या केवल शिक्षित और सीमित संतान वाले ही चुनाव लड़ने के योग्य हैं। सरकार के इस फैसले ने इस बहस को एक स्पष्ट दिशा दी है।
कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा ने कहा कि यह कदम लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप है और स्थानीय नेतृत्व में अधिक लोगों को भागीदारी का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने लिखित में जवाब देकर पारदर्शिता का उदाहरण पेश किया है।
वहीं, राज्य के राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह निर्णय लोकप्रिय और संवेदनशील वर्गों को सशक्त बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अधिक लोगों को भागीदारी का मौका मिलेगा और चुनाव प्रक्रिया में विविधता बढ़ेगी।
सरकार ने यह भी कहा कि विधि विभाग द्वारा प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों के लिए चुनाव पर लगी रोक हटा दी जाएगी। इससे उन परिवारों के लिए भी चुनाव में भागीदारी संभव हो सकेगी, जो अपने पारिवारिक निर्णयों में विविधता रखते हैं।
राज्य सरकार का यह कदम यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समावेशिता को बढ़ावा देना प्राथमिकता में है। शैक्षणिक योग्यता और संतान संख्या जैसी बाधाओं को हटाकर राज्य प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि हर वर्ग के लोग पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकें।
इस निर्णय से आने वाले स्थानीय चुनावों में नए चेहरे और व्यापक जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। इससे राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बढ़ावा मिलेगा और जनता की आवाज को मजबूत किया जा सकेगा।
