पानी रॉयल्टी विवाद: राजस्थान ने पंजाब की 1.44 लाख करोड़ की मांग ठुकराई
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पानी पर किसी भी प्रकार की रॉयल्टी की मांग न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के भी खिलाफ है। राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पानी कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संसाधन है।
उन्होंने कहा कि देश में जल संसाधनों का उपयोग साझा हित और आपसी समझ के आधार पर किया जाता है, न कि किसी आर्थिक लेन-देन के तहत। ऐसे में पानी के उपयोग पर रॉयल्टी की मांग करना उचित नहीं है।
क्या है विवाद:
दरअसल, पंजाब सरकार की ओर से यह मांग उठाई गई थी कि राज्य से गुजरने वाले जल संसाधनों के उपयोग के बदले अन्य राज्यों से रॉयल्टी ली जानी चाहिए। इसी क्रम में 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग का मुद्दा सामने आया।
हालांकि, राजस्थान सरकार ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है और इसे तथ्यों से परे बताया है।
संवैधानिक पहलू:
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जल संसाधनों को लेकर नीतियां संविधान और विभिन्न अंतर-राज्यीय समझौतों के तहत तय होती हैं। ऐसे में किसी एक राज्य द्वारा एकतरफा रॉयल्टी की मांग करना विवाद को और बढ़ा सकता है।
जल संसाधन मंत्री ने भी कहा कि इस तरह की मांगें न केवल कानूनी रूप से कमजोर हैं, बल्कि इससे राज्यों के बीच समन्वय भी प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक और आर्थिक असर:
इस विवाद का असर दोनों राज्यों के बीच संबंधों पर पड़ सकता है। वहीं, यदि इस तरह की मांगों को मान्यता मिलती है, तो अन्य राज्यों के बीच भी इसी तरह के विवाद खड़े हो सकते हैं।
